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George floyd Death: African american death protests spread across America fire burns near White House | अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में विरोध की आग; न्यूयॉर्क, शिकागो और लॉस एंजिल्स में प्रदर्शनकारियों और पुलिस में टकराव

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  • अमेरिका में करोनावायरस के चलते लॉकडाउन लगने के बाद तीन अश्वेत व्यक्तियों की हत्या हो चुकी है
  • लंदन, बर्लिन, क्राइस्टचर्च, सिडनी में हजारों लोगों ने फ्लॉयड के समर्थन में विरोध कर रहे लोगों के लिए मार्च निकाला

दैनिक भास्कर

Jun 01, 2020, 06:26 PM IST

वॉशिंगटन. अमेरिका में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस हिरासत में हुई मौत का मामला गरमाता जा रहा है। छह दिनों से देशभर में प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इस दौरान चार हजार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। कई शहरों में कर्फ्यू लगे होने के बाद भी लोग सड़कों पर लूटपाट और आगजनी कर रहे हैं। पुलिस पर हमले कर रहे हैं। दुनियाभर में हजारों लोग फ्लॉयड के समर्थन में विरोध कर रहे लोगों के लिए मार्च निकाल रहे हैं।

फ्लॉयड की गर्दन पर घुटना रखने वाले पुलिस अफसर को 27 मई को गिरफ्तार कर लिया गया। उस पर थर्ड डिग्री हत्या का आरोप लगाया गया है। इस मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सोमवार को उसे 8 जून को अदालत में पेश होने के लिए कहा है।

अमेरिका में क्यों हो रहा फसाद?
अमेरिका में हो रहे इस प्रदर्शन के पीछे केवल जॉर्ज फ्लायड की हत्या ही वजह नहीं है। देश में अश्वेतों के साथ भेदभाव और बुरा बर्ताव काफी समय से होता रहा है। यह गुस्सा वह बारूद का ढेर है है जो धीरे-धीरे सुलग रहा था और अब उसमें विस्फोट हुआ है। अमेरिका में कोरोना के चलते जब से लॉकडाउन लगा है, तब से तीन अश्वेतों की हत्या हो चुकी है। दो की हत्या तो पुलिस ने ही की, जबकि एक की हत्या में दो श्वेत शामिल हैं। ढीली प्रशासनिक कार्रवाई के चलते इस बार की घटना ने लोगों के गुस्से को भड़का दिया।

  • सबसे पहले 23 फरवरी को जॉर्जिया में एक अश्वेत 25 साल के अहद अर्बरी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मामले को लेकर कई विरोध-प्रदर्शन हुए। करीब दो महीने बाद दो आरोपियों 64 साल के ग्रेगरी मैककिमल और उसके बेटे 34 साल के ट्रैविस मैककिमल को गिरफ्तार किया गया। जांच अभी चल रही है।
  • इसके बाद 13 मार्च को लुइसविले में पुलिस ने एक अश्वेत महिला ब्रेओना टेलर की हत्या कर दी। 26 साल की ब्रेओना मेडिकल टेक्नीशियन थी। मादक पदार्थ की तस्करी के आरोप में पुलिस ने उसके घर छापा मारा। मेन गेट को तोड़ने के दौरान ब्रेओना के ब्वॉयफ्रेंड ने पुलिस पर फायर कर दिया। जवाब में पुलिस ने ब्रेओना को आठ गोलियां मारीं। हालांकि, बाद में ब्रेओना के घर से तलाशी में कोई मादक पदार्थ नहीं मिला।

क्या है प्रदर्शनों की वजह?

25 मई की शाम को पुलिस को सूचना मिली थी कि फ्लॉयड ने एक ग्रॉसरी स्टोर में 20 डॉलर को नकली नोट दिया है। इसी आरोप में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। इस दौरान पुलिस जब उसे गाड़ी में बैठाने का प्रयास कर रही थी, तभी वह नीचे गिर गया। वायरल वीडियो के मुताबिक, फ्लॉयड जमीन पर पड़ा नजर आ रहा है और पुलिस अफसर अपने घुटने से उसकी गर्दन को करीब आठ मिनट 46 सेकंड तक दबाए रखा था। फ्लॉयड के हाथों में हथकड़ी थी। इसमें 46 साल का जॉर्ज लगातार पुलिस अफसर से घुटना हटाने की गुहार लगाता रहा। वीडियो में फसे यह कहते हुए सुना गया कि आपका घुटना मेरे गर्दन पर है। मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं।’’ इसके बाद धीरे-धीरे उसकी हरकत बंद हो जाती है। अफसर कहते हैं, ‘उठो और कार में बैठो’, तब भी उसकी कोई प्रतिक्रिया नहीं आती। इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया जाता है, जहां एक घंटा बाद उसे मृत घोषित कर दिया जाता है। पुलिस की इस बर्बरता की वजह से ही देशभर में प्रदर्शन शरू हो गए।

कब से हो रहे हैं प्रदर्शन?
अमेरिका में पुलिस हिरासत में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के विरोध में 26 मई से प्रदर्शन हो रहे हैं। इस दौरान कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन भी हुए हैं। शिकागो, फिलाडेल्फिया समेत कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई है। लोगों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े। दो दिन पहले डेट्रॉयट में एक 19 साल की युवक की मौत भी हो गई।

कितने राज्यों में हालात बिगड़े?
अमेरिका के 15 राज्यों में प्रदर्शन हो रहे है। इसे देखते हुए प्रशासन ने इन राज्यों के 40 शहरों कर्फ्यू लगा दिया है। रविवार आधी रात लूइसविले और केंटकी में अधिकारियों ने भीड़ को हटाने के लिए गोली चलाई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई। उधर, ओकलैंड पुलिस के मुताबिक, कैलिफोर्निया में पिछली रात लोकल पुलिस बिल्डिंग में गोलीबारी की गई थी। इस मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। वॉशिंगटन के किंग काउंटी में हिंसा और प्रदर्शन के दौरान हुई चोरी के चलते आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी है। रविवार को हिंसक प्रदर्शन के दौरान बोस्टन के सात पुलिस अफसर घायल हो गए। वहीं, 21 पुलिस अफसर के वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।

प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
न्यूज चैनल सीएनएन के मुताबिक, वॉशिंगटन समेत 15 शहरों में करीब 5 हजार नेशनल गार्ड्स की तैनाती की गई है। जरूरत पड़ने के लिहाज से 2 हजार गार्ड्स को मुस्तैद रहने को कहा गया है। हिंसक प्रर्शन को देखते हुए अटलांटिक सिटी, न्यूजर्सी ने हफ्ते भर के लिए कर्फ्यू बढ़ा दिया है। वहीं, क्लीवलैंड और ओहियो ने मंगलवार कर कर्फ्यू बढ़ाया है। उधर, पोर्टलैंड पुलिस ने रविवार रात मार्क हैटफील्ड यूएस कोर्टहाउस में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए राइट कंट्रोल एजेंटो को तैनात किया था। मैसाचुसेट्स स्टेट पुलिस के प्रवक्ता डेविड प्रकोपियो ने सीएनएन को बताया कि प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए मैसाचुसेट्स नेशनल गार्ड को बोस्टन भेजा गया है। 

क्या राष्ट्रपति को भी सुरक्षित जगह ले जाया गया था?
हां। रविवार रात को भी प्रदर्शनकारियों ने व्हाइट हाउस के सामने काफी प्रदर्शन किया था। लिहाजा सुरक्षाबलों को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, शुक्रवार को व्हाइट हाउस के सामने प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को कुछ देर के लिए अंडरग्राउंड बंकर में ले जाना पड़ा था।

प्रदर्शनों को लेकर राष्ट्रपति का रुख है?
ट्रम्प का प्रदर्शनों को लेकर सख्त रवैया दिखाया। कहा- खुद को प्रदर्शनकारी कहने वाले इन लोगों को जॉर्ज फ्लॉयड के बारे में ज्यादा नहीं पता। अगर इन लोगों ने सीमा लांघी तो हमारे पास खतरनाक कुत्ते और हथियार हैं।

इस मामले पर क्या किसी और देश में भी प्रदर्शन हो रहे हैं?  
हां। अमेरिका में हो रहे प्रदर्शन के प्रति एकजूटता दिखाने के लिए लंदन, बर्लिन, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में प्रदरेशन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी तख्तियों पर ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ के नारे लिखकर अमेरिकी पुलिस की बर्बरता का विरोध कर रहे हैं। लंदन में लॉकडाउन का उल्लंघन करने के आरोप में 23 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। यहां ट्रफलगर स्कॉयर पर लोगों ने प्रदर्शन किया। न्यूजीलैंड में ऑकलैंड, वेलिंगटन और क्राइस्टचर्च समेत कई शहरों में लोगों ने प्रदर्शन किया। बर्लिन में अमेरिकी दूतावास के सामने लोगों ने शनिवार और रविवार को प्रदर्शन किया। ऑस्ट्रेलिया में इस हफ्ते कई जगह प्रदर्शन किए जाएंगे। सिडनी में मंगलवार को प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं, ब्रिस्बेन और मेलबोर्न में शनिवार को प्रदर्शन में हजारों लोग शामिल हुए।



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China: International Yoga Day was celebrated in low-key events due to COVID-19, standoff with India – भारत के साथ तनाव, COVID-19 की वजह से चीन में सादगी से मना अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

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भारत के साथ तनाव, COVID-19 की वजह से चीन में सादगी से मना अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

चीन में इस बार सादगी से मनाया गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

बीजिंग :

कोरोनावायरस (coronavirus) और भारत के साथ एलएसी पर तनाव की वजह से चीन में अतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) इस बार बहुत ही सादगी से मनाया गया. चीन में योग काफी लोकप्रिय है. संयुक्त राष्ट्र ने साल 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी. इसके बाद चीन में योग दिवस के मौके पर आमतौर पर कई बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.  

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इस साल, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मुख्य कार्यक्रम का आयोजन इंडिया हाउस में किया गया. कार्यक्रम की अगवाई चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिस्री ने की. इस दौरान, भारतीय और विदेशी राजनयिकों के साथ उनके परिवार ने शिरकत की. मिस्री ने कहा कि इस साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस “चुनौतियों से भरा” रहा. उन्होंने बताया, “चुनौतियों के बावजूद हमने थोड़ा बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित करने का सोचा था लेकिन बीजिंग में कोरोना महामारी फिर से फैलने से हमें अपनी योजना टालकर छोटा कार्यक्रम करना पड़ा.”  

चीन में पिछले कुछ हफ्तों में कोरोना के नए मामले सामने आए हैं. इससे पहले चीन ने कोरोनावायरस पर पूरी तरह से काबू करने की बात कही थी. एनएचसी ने शनिवार को कहा कि चीन में अब तक कोरोना के 83,352 मामले दर्ज किए गए जबकि 4,634 लोगों की मौत हुई है. 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन में कुछ योग एसोसिएशनों ने योग दिवस के मौके पर कार्यक्रम आयोजित किए.

चीन में योग कार्यक्रमों के छोटे पैमाने पर आयोजित करने की एक वजह भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प भी है. सैन्य झड़प की वजह से भारत और चीन सरहद पर तनाव और ज्यादा बढ़ गया है. चीन के साथ झड़प में 20 भारतीय जवान की जान गई थी. कहा जा रहा है कि इस झड़प में चीन को जानी नुकसान हुआ है.   

वीडियो: ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ पर देशभर के लोगों ने किया योग

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Delhi To Conduct Serological Survey From June 27 To Curb Spread Of COVID

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गृहमंत्री ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिए कि जिला स्तरीय टीम बनाई जाए और कंटेनमेंट जोन में सर्वे का काम 30 जून तक पूरा हो जाना चाहिए.

नई दिल्ली: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिल्ली में कोरोना कंटेनमेंट रणनीति पर डॉ. पॉल समिती की रिपोर्ट पर चर्चा हुई. गृह मंत्रालय ने बताया, पूरी दिल्ली में 27 जून से 10 जुलाई के बीच एक सेरोलॉजिकल सर्वे कराया जाएगा, जिसमें 20 हजार लोगों की सैंपल टेस्टिंग होगी. इसके द्वारा दिल्ली में संक्रमण के फैलाव का आंकलन हो सकेगा और एक व्यापक रणनीति निर्धारित की जा सकेगी.

दिल्ली के हर जिले को एक बड़े अस्पताल से जोड़ा जाएगा. दिल्ली सरकार 22 जून तक एक योजना निर्धारित करेगी, 23 जून तक जिला स्तरीय टीमों का गठन होगा, 26 जून तक सभी कंटेनमेंट जोन्स का संशोधित परिसीमन किया जाएगा, 30 जून तक कंटेनमेंट जोन्स का सर्वे होगा.

होम आइसोलेशन की केंद्र सरकार को देनी होगी रिपोर्ट

दिल्ली सरकार हर मृतक का आंकलन कर बताएगी कि उसे कितने दिन पहले कहां से अस्पताल लाया गया था. अगर मरीज होम आइसोलेशन में था, तो उसे सही समय पर लाया गया था या नहीं. सभी कोरोना पॉजिटिव मामलों को पहले कोरोना सेंटर जाना होगा और जिन लोगों के घरों में सही व्यवस्था है और जो किसी अन्य को-मोरबिडिटी से ग्रस्त नहीं है उन्हें होम आइसोलेशन में रखा जाए. कितने लोगों को होम आइसोलेशन में रखा गया है, इसकी जानकारी भारत सरकार को देनी होगी.

कंटेनमेंट जोन्स का नए सिरे से परिसीमन

डॉ. पॉल समिती ने रिपोर्ट में कंटेनमेंट जोन्स का नए सिरे से परिसीमन, इनकी सीमा पर और इनके अंदर की गतिविधियों पर सख्ती से निगरानी और नियंत्रण का सुझाव दिया गया. इसके अलावा सभी संक्रमित व्यक्तियों की कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग और क्वारंटाइनिंग करने के लिए आरोग्य सेतु और इतिहास एप के इस्तेमाल का भी सुझाव दिया गया. कंटेनमेंट जोन्स के बाहर हर घर की लिस्ट लगाने पर भी चर्चा हुई. कोविड मरीजों को अस्पताल, कोविड सेंटर या होम आइसोलेशन में रखने का निर्देश दिया गया.

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दिल्ली: जानें किस प्राइवेट अस्पताल में कितने बेड पर मिल सकेगा कोरोना का सस्ता इलाज, सर्कुलर जारी

Coronavirus: दिल्ली में 3000 नए केस और 63 लोगों की मौत, एक दिन में 1719 मरीज ठीक हुए

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Bollywood News In Hindi : Amrish Puri himself designed the costume for the role of Mogambo, Director Bonnie Kapoor gave Rs 10,000 as bonus | मोगैंबो के किरदार के लिए अमरीश पुरी ने खुद डिजाइन की थी कॉस्ट्यूम, डायरेक्टर बोनी कपूर ने इम्प्रेस होकर दिए थे 10 हजार रुपए

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दैनिक भास्कर

Jun 22, 2020, 05:00 AM IST

उमेश कुमार उपाध्याय.

बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर अमरीश पुरी भले ही अब इस दुनिया में ना हों मगर उन्होंने अपने किरदारों को हमेशा के लिए अमर कर दिया है। मिस्टर इंडिया का मोगैंबो हो या डीडीएलजे के बाबूजी अमरीश ने अपनी एक्टिंग से किरादरों में चार चांद लगाए हैं। आज अमरीश जी के जन्मदिन के खास मौके पर उनके दोस्त बोनी कपूर ने भास्कर से बातचीत में उनसे जुड़े खास किस्से शेयर किए हैं।

हम पांच के लिए खुद डिजाइन की थी बिग

अमरीश पुरी को बड़ी स्टारडम मेरी फिल्म हम पांच से मिली। वे अपने काम को लेकर इतने डेडीकेटेड थे कि हर चीज की डिटेल्स में जाते थे। इस फिल्म में अमरीश जी ने अपनी बिग खुद ही डिजाइन की थी। निर्देशक बापू जी ने उन्हें इशारों में कुछ बताया और स्केच बनाकर दिया था। उसके बाद तो उन्होंने अपनी बिग खुद ही डिजाइन की।

फिल्म हिट होने पर दिया 10 हजार रुपए बोनस

हम पांच के लिए अमरीश पुरी को 40 हजार रुपए फीस दी गई थी। फिल्म हिट होने के बाद उन्हें बोनस के रूप में 10 हजार रुपए और दिया तो खुश हो गए। उस समय प्राण और बाकी विलेन 3 लाख रुपए लिया करते थे। मैंने उनसे पिक्चर बनते समय कहा था कि इसके बाद आपकी प्राइस बढ़कर ढाई लाख रुपए हो जाएगी। हम पांच से पहले भी उन्होंने पिक्चरों में रोल किया था, पर हम पांच से जो स्टारडम और पहचान मिली, वह अब तक के किए गए सभी किरदारों से कहीं ज्यादा थी। इस तरह हमारा साथ शुरू हुआ।

मिस्टर इंडिया में अमरीश से पहले कई एक्टर का लिया था ऑडिशन

मिस्टर इंडिया के लिए हम फ्रेश फेस देना चाह रहे थे।  इसके लिए मुंबई में जितने भी विलेन थे, उन सभी के ऑडिशन लिए थे। लेकिन जावेद ने जिस रुवाब से मोगैंबो के किरदार को लिखा था, उस पर कोई सही उतर नहीं पा रहा था तो हमने फाइनली अमरीश पुरी जी को ही लेना सही समझा। उस समय वे बहुत बिजी चल रहे थे। हमने उनसे कहा कि मुझे अगले हफ्ते से आपके 60 दिन चाहिए, क्योंकि पूरे क्लाइमैक्स के लिए आर के स्टूडियो में हमारे कुल 5 सेट लगे थे। उन्होंने तुरंत हां बोल दिया। 

दरअसल जब एक्टर्स पास जाते हैं तो वह कहते हैं कि सोचेंगे, करेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने इसके बारे में बहुत सुना है और मैं खुश हूं कि तुम फाइनली मेरे पास आ गए। मैं जो भी डेट होगी आपकी उससे मैच करूंगा। इस तरह हमने शूटिंग शुरू की और बड़े विलेन के रूप में अमरीश पुरी का एक नया चेहरा सामने आया। हमने हम पांच में भी उन्हें इसीलिए लिया था कि यह एक फ्रेश फेस हैं। शोले में जब अमजद खान लाॉन्च हुए थे, वह भी बिल्कुल फ्रेश फेस थे।

मोगैंबो के लिए खुद डिजाइन करवाए कॉस्टयूम

हमने अमरीश पुरी को मोगैंबो तो बना लिया था, पर हमारे दिमाग में उसकी कॉस्टयूम और गेटअप क्लीयर नहीं था। पूरा गेटअप बनाने में अमरीश पुरी का बड़ा हाथ रहा। अपने खास टेलर माधव के साथ मिलकर अमरीश ने पूरा गेटअप डिजाइन बनवाया। मैं उस कॉस्टयूम से इतना प्रभावित हुआ था कि मैंने उनके डिजाइनर माधव को उस समय 10 हजार रुपए बोनस में दिए। हमारे मन में विलेन का किरदार तो था, पर क्लियर विजुअल नहीं था। इसे अमरीश जी ने खुद बनाया। बिग, कॉस्टयूम, हाथ में ली हुई छड़ी सब अमरीश ने खुद ही माधव के साथ डिजाइन की थी।

मोगैंबो के लिए किया खूब रिहर्सल 

अमरीश पुरी की आदत थी, जब उन्हें रोल भा जाता था, तब वह हर चीज की डिटेलिंग में जाते थे और मोगैंबो की हर डिटेलिंग में जाकर उन्होंने कमाल का काम किया। इस किरदार को जीवंत करने के लिए उन्होंने खूब रिहर्सल की थी। उन्होंने हर डायलॉग जावेद जी के साथ बैठकर पढ़ा था साथ ही सेट पर शेखर ने भी उनसे रिहर्सल्स करवाई। उन्होंने हर चीज के लिए बहुत ज्यादा कड़ी मेहनत की थी।

पूरा क्रेडिट में अमरीश पुरी को देना चाहूंगा

हीरो बड़ा तब होता है, जब सामने विलेन टक्कर का हो। मिस्टर इंडिया के सामने हमें बड़ा विलेन चाहिए था और मैं नहीं समझता कि अमरीश पुरी से बड़ा विलेन कोई हो सकता है। इसका पूरा क्रेडिट मैं अमरीश पुरी को देना चाहूंगा। खैर, लाइन तो जावेद जी ने लिखी थी- मोगेंबो खुश हुआ। यह तकिया कलाम लोग आज तक याद करते हैं, पर इस किरदार में चार चांद अमरीश पुरी ने अपनी मेहनत से लगाए थे।

मोगैंबो की कामयाबी से मिली और फिल्में

मिस्टर इंडिया के बाद हमने विरासत में उनके साथ काम किया। इस पूरे प्रोजेक्ट का सेटअप मैंने किया था। इसमें फिर अमरीश जी ने पॉजिटिव रोल किया था और कमाल का काम किया था। साथ ही मिस्टर इंडिया के बाद उन्होंने उनकी हॉलीवुड की पहली फिल्म की, साथ ही साउथ के भी नंबर वन विलेन हो गए थे। वे वहां की भी बड़ी फिल्मों में विलेन हुआ करते थे। यह सब मोगैंबो पर की हुई उनकी मेहनत की वजह से था।

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