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Exclusive Galwan Valley Incident Story Of Brave Indian Army ANN

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जय बजरंग बली के उदघोष के साथ ‘वीर-बिहारियों’ ने चीनी कैंप में आग लगा दी थी. बिहार रेजीमेंट ने चीनी कैंप पर ऐसा हमला किया था जो इतिहास में दर्ज हो जाएगा.

नई दिल्ली: गलवान घाटी में हुई हिंसक संघर्ष की कहानी अब छन छन कर सामने आने लगी है. ये कहानी ऐसी है जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे. ‘वीर बिहारियों’ की वीर गाथा सुनकर आप भी दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे. एबीपी न्यूज़ के पास इस संघर्ष की बेहद ही एक्सक्लूसिव जानकारी है.

प्रधानमंत्री ने बहादुर सैनिकों की प्रसंशा

बता दें कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संघर्ष में वीरगति को प्राप्त हुए बहादुर सैनिकों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि मरते मरते वे दुश्मन को मार कर गए. सूत्रों ने एबीपी न्यूज को बताया कि 15/16 जून की रात गलवान घाटी में बिहार रेजीमेंट के चीनी सेना पर किए गए हमले को सैन्य इतिहास के सबसे ‘साहसिक और घातक’ के तौर पर जाने जाएगी.

सूत्रों के मुताबिक, बिहार रेजीमेंट की 16वीं बटालियन यानि 16 बिहार यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर‌(सीओ), कर्नल बी संतोष बाबू के चीन की गद्दारी के चलते वीरगति प्राप्त होने के बाद उनके सेकेंड इन कमांड (टूआईसी) और दो युवा अफसरों ने  यूनिट की जिम्मेदारी संभाली ली थी. इन तीनों ऑफिसर्स (एबीपी न्यूज़ सुरक्षा कारणों से इन तीनों के नाम का खुलासा नहीं कर रहा है) ने बिहार रेजीमेंट के घातक कमांडोज़ के साथ चीनी कैंप पर ऐसा हमला बोला कि चीनी सेना आज भी त्राहिमाम कर रही है. वो भी तब जबकि इन वीर बिहारियों ने दुश्मन पर एक भी गोली नहीं चलाई, क्योंकि दोनों देशों के बीच हुई संधि के मुताबिक एलएसी के दो किलोमीटर के दायरे में कोई फायरिंग या गोलाबारी नहीं होनी चाहिए.

बता दें कि किसी भी यूनिट में कमांडिंग ऑफिसर एक पिता-तुल्य होता है. यही वजह है कि सीओ की मौत की खबर सुनकर वीर बिहारी चीनी सेना पर टूट पड़े. इस मिशन में उनका साथ दिया फील्ड रेजीमेंट यानि तोपखाने के सैनिकों ने, जो उस वक्त वहां तैनात थे.

15 जून को दोनों देशों के सेनाओं की कर्नल स्तर पर हुई थी बैठक

दरअसल, 15 जून को भारत और चीन की सेनाओं के कर्नल स्तर के अधिकारियों की बैठक गलवान घाटी की पेट्रोलिंग पॉइंट नंबर 14 पर हुई थी. ये मीटिंग 6 जून को भारत और चीन के कोर कमांडर स्तर के अधिकारियों के एलएसी पर डिसइंगेजमेंट यानि विवादित इलाकों से अपनी अपनी सेना को पीछे करने के लिए हुई थी.

15 जून यानि सोमवार की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया, कर्नल संतोष बाबू ने, क्योंकि उनकी यूनिट, 16 बिहार इसी पीपी-14 पर तैनात थी. मीटिंग में चीन के कर्नल (कमांडिंग ऑफिसर) ने पीपी-14 पर बने अपने एक टेंट को हटाने पर राजी हो गया था. ये दरअसल, ये चीन की पीएलए सेना की एक ऑबजर्वेशन पोस्ट थी, जहां से दुरबुक-श्योक-डीबीओ रोड की निगरानी की जा सकती थी. ये पोस्ट‌ एक ऊंचे पहाड़ पर थी और चीनी सेना के अधिकार-क्षेत्र में थी. लेकिन क्योंकि दोनों देश संधियों से बंधे थे कि विवादित क्षेत्र में पेट्रोलिंग तो की जा सकती है लेकिन सेनाएं यहां किसी तरह की स्थायी या अस्थायी पोस्ट नहीं बना सकती हैं. इसलिए भारतीय सेना ने इस अस्थायी पोस्ट का विरोध किया था.

क्योंकि जैसाकि मीटिंग में तय हुआ था भारतीय सैनिक भी टकराव वाली जगह से थोड़ा पीछे हट गए थे ऐसे में शाम के वक्त कर्नल संतोष ने एक मेजर रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में 12 सदस्य पेट्रोलिंग पार्टी को देखने के लिए भेजा कि चीनी सेना ने अपनी पोस्ट हटाई है या नहीं?

जब चीनी सेना ने टेंट-नुमा ऑबजर्वेशन-पोस्ट को नहीं हटाया…

लेकिन शाम तक भी जब चीनी सेना ने अपने इस टेंट-नुमा ऑबजर्वेशन-पोस्ट को नहीं हटाया तो भारतीय सेना की 12 सदस्य पेट्रोलिंग पार्टी को वहां भेजा गया ताकि वस्तु-स्थिति का पता लगाया जा सके. ये पेट्रोलिंग पार्टी ऐसा लगता है अपने साथ कोई हथियार लेकर नहीं गई थी. यही वजह है कि चीनी सैनिकों ने इस भारतीय सैनिकों को बंधरक्षक बना लिया.

जैसे ही ये खबर कर्नल संतोष को लगी वे अपने दो जवानों के साथ चीनी खेम में पहुंच गए. उन्हें उम्मीद दी थी कि क्योंकि दिन में उन्होनें चीन के सीओ से बैठक की थी, वो उनके सैनिकों को रिहा करने की बात मान लेगा. यही वजह है कि वे अपने दो जवानों के साथ पहाड़ पर बनी चीनी पोस्ट पर पहुंचे गए.

चीन के कैंप में हुई कहासुनी- सूत्र

खुद कर्नल संतोष कुछ सैनिकों के साथ चीन के कैंप चले गए ताकि चीन के कमांडिंग ऑफिसर से इसका विरोध दर्ज कराया जा सके. लेकिन सूत्रों की मानें तो चीन के कैंप में ही कर्नल संतोष और उनके जवानों की कहासुनी हो गई. इसके बाद ज्यादा संख्या में मौजूद चीनी सैनिकों ने कर्नल संतोष और उनके साथ गए कुछ सैनिकों को घेर लिया और लाठी, डंडों और कटीली तार लगे रॉड से उनपर हमला बोल दिया. अचानक हुए इस हमले में कर्नल संतोष ने दम तोड़ दिया.

अब तक आधी रात गुजर चुकी थी और मंगलवार लग चुका था लेकिन कर्नल संतोष की हत्या के बाद पूरी बिहारी-पलटन का खून खौल उठा. 16 बिहार के टूआईसी, जो लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के अधिकारी थे और दो कैप्टन स्तर के अधिकारियों के साथ करीब 300 सैनिकों ने चीनी कैंप पर रात में ही हमला बोल दिया. हालांकि पहाड़ पर बैठे चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर जमकर पत्थरबाजी की लेकिन वीर-बिहारी खेमे तक पहुंच गए. ‘जय बजरंग बली’ के उदघोष के साथ भारतीय सैनिकों ने चीन के कैंप में आग लगा दी. इस बार भारतीय सैनिकों भी लाठी-डंडे और बेयोनेट (यानि लंबे खंजर) से लैस थे. हमला राइफल की बट से भी किया गया. चीनी खेमें में हड़कंप मच गया. कई घंटे तक लड़ाई चली.

भारतीए सैनिकों ने तोड़ दी गर्दन

सूत्रों के मुताबिक घातक कमांडो ने कम से कम 15 चीनी सैनिकों की गर्दन तोड़ दीं जिससे उन्होनें मौके पर ही दम तोड़ दिया. कई चीनी सैनिकों के सिर पत्थर से कुचल दिए गए. सूत्रों की मानें तो चीनी सैनिक पहले से तैयार थे और हमले के दौरान वे खास रॉउटे्स-गियर यानी दंगे के दौरान सुरक्षाकर्मियों के पहने जाने वाले गियर में थे. यही वजह है कि भारतीय सैनिकों ने उनकी गर्दन तोड़ दी या फिर सिर पर पत्थर से वार किया.

सूत्रों के मुताबिक, जिस पहाड़ी पर चीनी कैंप लगा था वो भारत और चीन के सैनिकों के भार से टूटकर नीचे गिर गई और उसके साथ ही दोनों तरफ के सैनिक नीचे बहती बर्फ के समान ठंडी गलवान नदी में आ गिरे. इस नदीं में गिरने और ठंड लगने से दोनों तरफ के सैनिक बड़ी तादाद में हताहत हुए.

भारतीय सेना के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष में कर्नल संतोष बाबू सहित कुल 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए. करीब 18 भारतीय सैनिक बुरी तरह घायल हुए. 58 सैनिकों को मामूली चोटें आईं.

चीनी सेना को हुआ जबरदस्त नुकसान

लेकिन वीर-बिहारियों के इस हमले में चीनी सेना को जबरदस्त नुकसान हुआ. चीन के कम से कम 40 सैनिकों की जान चली गई और 100-150 सैनिक घायल हुए हैं. कई चीनी सैनिकों के शव गलवान नदी की धारा को रोककर निकाली गए. क्योंकि ये गलवान नदी अक्साई चिन से भारत के पूर्वी लद्दाख में बहने वाली श्योक नदी में मिलती है.

घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए चीनी सेना को हेलीकॉप्टर लगाने पड़े. खुद भारत सरकार के मंत्री और पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल वी के सिंह ने चीन की फौज को हुए बड़े नुकसान की तस्दीक की है. जनरल वी के सिंह ने यहां तक दावा किया है कि जिस तरह चीनी सेना ने दस भारतीय सैनिकों को बंधक बनाया था ठीक वैसे ही भारतीय सेना ने भी चीनी सैनिकों को बनाया था. हालांकि, भारतीय सेना ने अभी तक इस तथ्य की पुष्टि नहीं की है.

पराक्रम को सैल्यूट करने के लिए सेना की उत्तरी कमान वीडियो जारी किया

बिहार रेजीमेंट के शौर्य और पराक्रम को सैल्यूट करने के लिए सेना की उत्तरी कमान ने एक वीडियो जारी किया, ‘करम ही धरम’ नाम से जो बिहार रेजीमेंट का आर्दश-वाक्य है. इसमें सेना ने कहा है कि हर सोमवार के बाद मंगलवार जरूर आता है. क्योंकि मंगलवार को ही भारतीय सेना ने चीन के खेमे में आग लगाकर चीनी सेना की कमर तोड़ दी थी. मंगलवार का दिन बजरंग बली, हनुमान जी का होता है और ‘जय बजरंग बली’ बिहार रेजीमेंट का उदघोष भी है. इस वीडियो में बिहार रेजीमेंट द्वारा ठीक 21 साल पहले करगिल युद्ध में बहादुरी के कारनामों को भी सैल्यूट किया गया है.

बिहार रेजीमेंट की इस बहादुरी कारनामे को प्रथम विश्व युद्ध के कुछ लड़ाइयों से जोड़कर देखा जा रहा है. गलवान घाटी में चीनी सेना को बड़े तादाद में हुए नुकसान के बाद चीनी कमांडर भारत से जंग के बजाए बातचीत की गुहार लगा रहे हैं. चीन का विदेश मंत्रालय लगातार इस बात को उठा रहा है कि भारतीय सैनिकों ने एलएसी पार कर उनके इलाके में हिंसक संघर्ष किया. लेकिन भारतीय सेना के सूत्रों का कहना है कि भारतीय ‌सैनिकों ने अपनए कमांडिंग ऑफिसर की धोखे से हत्या करने का बदला लेने के इरादे से चीन की सीमा में दाखिल हुए थे और बदला पूरा होने के बाद वापस अपनी सीमा में लौट आए थे.

साफ है जिस चीनी सेना ने ताइवन और तिब्बत से लेकर अक्साई चिन और शिंचियांग तक में कब्जा किया वो गलवान घाटी में भारतीय सेना के जबरदस्त प्रहार के सदमे से बाहर नहीं आ पाई है. उसने अभी तक ना तो ये बताया कि उसके कितने सैनिक मारे गए और ना ही कितने घायल हुए. यहां तक कि भारतीय सैनिकों के बंधक बनाए जाने से भी साफ इंकार कर दिया.

विदेश मंत्रालय की चीन को दो टूक- गलवान घाटी भारत का हिस्सा है

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China: International Yoga Day was celebrated in low-key events due to COVID-19, standoff with India – भारत के साथ तनाव, COVID-19 की वजह से चीन में सादगी से मना अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

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भारत के साथ तनाव, COVID-19 की वजह से चीन में सादगी से मना अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

चीन में इस बार सादगी से मनाया गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

बीजिंग :

कोरोनावायरस (coronavirus) और भारत के साथ एलएसी पर तनाव की वजह से चीन में अतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) इस बार बहुत ही सादगी से मनाया गया. चीन में योग काफी लोकप्रिय है. संयुक्त राष्ट्र ने साल 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी. इसके बाद चीन में योग दिवस के मौके पर आमतौर पर कई बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.  

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इस साल, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मुख्य कार्यक्रम का आयोजन इंडिया हाउस में किया गया. कार्यक्रम की अगवाई चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिस्री ने की. इस दौरान, भारतीय और विदेशी राजनयिकों के साथ उनके परिवार ने शिरकत की. मिस्री ने कहा कि इस साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस “चुनौतियों से भरा” रहा. उन्होंने बताया, “चुनौतियों के बावजूद हमने थोड़ा बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित करने का सोचा था लेकिन बीजिंग में कोरोना महामारी फिर से फैलने से हमें अपनी योजना टालकर छोटा कार्यक्रम करना पड़ा.”  

चीन में पिछले कुछ हफ्तों में कोरोना के नए मामले सामने आए हैं. इससे पहले चीन ने कोरोनावायरस पर पूरी तरह से काबू करने की बात कही थी. एनएचसी ने शनिवार को कहा कि चीन में अब तक कोरोना के 83,352 मामले दर्ज किए गए जबकि 4,634 लोगों की मौत हुई है. 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन में कुछ योग एसोसिएशनों ने योग दिवस के मौके पर कार्यक्रम आयोजित किए.

चीन में योग कार्यक्रमों के छोटे पैमाने पर आयोजित करने की एक वजह भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प भी है. सैन्य झड़प की वजह से भारत और चीन सरहद पर तनाव और ज्यादा बढ़ गया है. चीन के साथ झड़प में 20 भारतीय जवान की जान गई थी. कहा जा रहा है कि इस झड़प में चीन को जानी नुकसान हुआ है.   

वीडियो: ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ पर देशभर के लोगों ने किया योग

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Delhi To Conduct Serological Survey From June 27 To Curb Spread Of COVID

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गृहमंत्री ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिए कि जिला स्तरीय टीम बनाई जाए और कंटेनमेंट जोन में सर्वे का काम 30 जून तक पूरा हो जाना चाहिए.

नई दिल्ली: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिल्ली में कोरोना कंटेनमेंट रणनीति पर डॉ. पॉल समिती की रिपोर्ट पर चर्चा हुई. गृह मंत्रालय ने बताया, पूरी दिल्ली में 27 जून से 10 जुलाई के बीच एक सेरोलॉजिकल सर्वे कराया जाएगा, जिसमें 20 हजार लोगों की सैंपल टेस्टिंग होगी. इसके द्वारा दिल्ली में संक्रमण के फैलाव का आंकलन हो सकेगा और एक व्यापक रणनीति निर्धारित की जा सकेगी.

दिल्ली के हर जिले को एक बड़े अस्पताल से जोड़ा जाएगा. दिल्ली सरकार 22 जून तक एक योजना निर्धारित करेगी, 23 जून तक जिला स्तरीय टीमों का गठन होगा, 26 जून तक सभी कंटेनमेंट जोन्स का संशोधित परिसीमन किया जाएगा, 30 जून तक कंटेनमेंट जोन्स का सर्वे होगा.

होम आइसोलेशन की केंद्र सरकार को देनी होगी रिपोर्ट

दिल्ली सरकार हर मृतक का आंकलन कर बताएगी कि उसे कितने दिन पहले कहां से अस्पताल लाया गया था. अगर मरीज होम आइसोलेशन में था, तो उसे सही समय पर लाया गया था या नहीं. सभी कोरोना पॉजिटिव मामलों को पहले कोरोना सेंटर जाना होगा और जिन लोगों के घरों में सही व्यवस्था है और जो किसी अन्य को-मोरबिडिटी से ग्रस्त नहीं है उन्हें होम आइसोलेशन में रखा जाए. कितने लोगों को होम आइसोलेशन में रखा गया है, इसकी जानकारी भारत सरकार को देनी होगी.

कंटेनमेंट जोन्स का नए सिरे से परिसीमन

डॉ. पॉल समिती ने रिपोर्ट में कंटेनमेंट जोन्स का नए सिरे से परिसीमन, इनकी सीमा पर और इनके अंदर की गतिविधियों पर सख्ती से निगरानी और नियंत्रण का सुझाव दिया गया. इसके अलावा सभी संक्रमित व्यक्तियों की कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग और क्वारंटाइनिंग करने के लिए आरोग्य सेतु और इतिहास एप के इस्तेमाल का भी सुझाव दिया गया. कंटेनमेंट जोन्स के बाहर हर घर की लिस्ट लगाने पर भी चर्चा हुई. कोविड मरीजों को अस्पताल, कोविड सेंटर या होम आइसोलेशन में रखने का निर्देश दिया गया.

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दिल्ली: जानें किस प्राइवेट अस्पताल में कितने बेड पर मिल सकेगा कोरोना का सस्ता इलाज, सर्कुलर जारी

Coronavirus: दिल्ली में 3000 नए केस और 63 लोगों की मौत, एक दिन में 1719 मरीज ठीक हुए

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Bollywood News In Hindi : Amrish Puri himself designed the costume for the role of Mogambo, Director Bonnie Kapoor gave Rs 10,000 as bonus | मोगैंबो के किरदार के लिए अमरीश पुरी ने खुद डिजाइन की थी कॉस्ट्यूम, डायरेक्टर बोनी कपूर ने इम्प्रेस होकर दिए थे 10 हजार रुपए

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दैनिक भास्कर

Jun 22, 2020, 05:00 AM IST

उमेश कुमार उपाध्याय.

बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर अमरीश पुरी भले ही अब इस दुनिया में ना हों मगर उन्होंने अपने किरदारों को हमेशा के लिए अमर कर दिया है। मिस्टर इंडिया का मोगैंबो हो या डीडीएलजे के बाबूजी अमरीश ने अपनी एक्टिंग से किरादरों में चार चांद लगाए हैं। आज अमरीश जी के जन्मदिन के खास मौके पर उनके दोस्त बोनी कपूर ने भास्कर से बातचीत में उनसे जुड़े खास किस्से शेयर किए हैं।

हम पांच के लिए खुद डिजाइन की थी बिग

अमरीश पुरी को बड़ी स्टारडम मेरी फिल्म हम पांच से मिली। वे अपने काम को लेकर इतने डेडीकेटेड थे कि हर चीज की डिटेल्स में जाते थे। इस फिल्म में अमरीश जी ने अपनी बिग खुद ही डिजाइन की थी। निर्देशक बापू जी ने उन्हें इशारों में कुछ बताया और स्केच बनाकर दिया था। उसके बाद तो उन्होंने अपनी बिग खुद ही डिजाइन की।

फिल्म हिट होने पर दिया 10 हजार रुपए बोनस

हम पांच के लिए अमरीश पुरी को 40 हजार रुपए फीस दी गई थी। फिल्म हिट होने के बाद उन्हें बोनस के रूप में 10 हजार रुपए और दिया तो खुश हो गए। उस समय प्राण और बाकी विलेन 3 लाख रुपए लिया करते थे। मैंने उनसे पिक्चर बनते समय कहा था कि इसके बाद आपकी प्राइस बढ़कर ढाई लाख रुपए हो जाएगी। हम पांच से पहले भी उन्होंने पिक्चरों में रोल किया था, पर हम पांच से जो स्टारडम और पहचान मिली, वह अब तक के किए गए सभी किरदारों से कहीं ज्यादा थी। इस तरह हमारा साथ शुरू हुआ।

मिस्टर इंडिया में अमरीश से पहले कई एक्टर का लिया था ऑडिशन

मिस्टर इंडिया के लिए हम फ्रेश फेस देना चाह रहे थे।  इसके लिए मुंबई में जितने भी विलेन थे, उन सभी के ऑडिशन लिए थे। लेकिन जावेद ने जिस रुवाब से मोगैंबो के किरदार को लिखा था, उस पर कोई सही उतर नहीं पा रहा था तो हमने फाइनली अमरीश पुरी जी को ही लेना सही समझा। उस समय वे बहुत बिजी चल रहे थे। हमने उनसे कहा कि मुझे अगले हफ्ते से आपके 60 दिन चाहिए, क्योंकि पूरे क्लाइमैक्स के लिए आर के स्टूडियो में हमारे कुल 5 सेट लगे थे। उन्होंने तुरंत हां बोल दिया। 

दरअसल जब एक्टर्स पास जाते हैं तो वह कहते हैं कि सोचेंगे, करेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने इसके बारे में बहुत सुना है और मैं खुश हूं कि तुम फाइनली मेरे पास आ गए। मैं जो भी डेट होगी आपकी उससे मैच करूंगा। इस तरह हमने शूटिंग शुरू की और बड़े विलेन के रूप में अमरीश पुरी का एक नया चेहरा सामने आया। हमने हम पांच में भी उन्हें इसीलिए लिया था कि यह एक फ्रेश फेस हैं। शोले में जब अमजद खान लाॉन्च हुए थे, वह भी बिल्कुल फ्रेश फेस थे।

मोगैंबो के लिए खुद डिजाइन करवाए कॉस्टयूम

हमने अमरीश पुरी को मोगैंबो तो बना लिया था, पर हमारे दिमाग में उसकी कॉस्टयूम और गेटअप क्लीयर नहीं था। पूरा गेटअप बनाने में अमरीश पुरी का बड़ा हाथ रहा। अपने खास टेलर माधव के साथ मिलकर अमरीश ने पूरा गेटअप डिजाइन बनवाया। मैं उस कॉस्टयूम से इतना प्रभावित हुआ था कि मैंने उनके डिजाइनर माधव को उस समय 10 हजार रुपए बोनस में दिए। हमारे मन में विलेन का किरदार तो था, पर क्लियर विजुअल नहीं था। इसे अमरीश जी ने खुद बनाया। बिग, कॉस्टयूम, हाथ में ली हुई छड़ी सब अमरीश ने खुद ही माधव के साथ डिजाइन की थी।

मोगैंबो के लिए किया खूब रिहर्सल 

अमरीश पुरी की आदत थी, जब उन्हें रोल भा जाता था, तब वह हर चीज की डिटेलिंग में जाते थे और मोगैंबो की हर डिटेलिंग में जाकर उन्होंने कमाल का काम किया। इस किरदार को जीवंत करने के लिए उन्होंने खूब रिहर्सल की थी। उन्होंने हर डायलॉग जावेद जी के साथ बैठकर पढ़ा था साथ ही सेट पर शेखर ने भी उनसे रिहर्सल्स करवाई। उन्होंने हर चीज के लिए बहुत ज्यादा कड़ी मेहनत की थी।

पूरा क्रेडिट में अमरीश पुरी को देना चाहूंगा

हीरो बड़ा तब होता है, जब सामने विलेन टक्कर का हो। मिस्टर इंडिया के सामने हमें बड़ा विलेन चाहिए था और मैं नहीं समझता कि अमरीश पुरी से बड़ा विलेन कोई हो सकता है। इसका पूरा क्रेडिट मैं अमरीश पुरी को देना चाहूंगा। खैर, लाइन तो जावेद जी ने लिखी थी- मोगेंबो खुश हुआ। यह तकिया कलाम लोग आज तक याद करते हैं, पर इस किरदार में चार चांद अमरीश पुरी ने अपनी मेहनत से लगाए थे।

मोगैंबो की कामयाबी से मिली और फिल्में

मिस्टर इंडिया के बाद हमने विरासत में उनके साथ काम किया। इस पूरे प्रोजेक्ट का सेटअप मैंने किया था। इसमें फिर अमरीश जी ने पॉजिटिव रोल किया था और कमाल का काम किया था। साथ ही मिस्टर इंडिया के बाद उन्होंने उनकी हॉलीवुड की पहली फिल्म की, साथ ही साउथ के भी नंबर वन विलेन हो गए थे। वे वहां की भी बड़ी फिल्मों में विलेन हुआ करते थे। यह सब मोगैंबो पर की हुई उनकी मेहनत की वजह से था।

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