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Bollywood News In Hindi : JP Dutta made ‘Paltan’ filmon indo-china dispute two years ago, said – ‘The real enemy is china not pakistan | भारत-चीन विवाद पर जे पी दत्ता ने दो साल पहले बनाई थी ‘पलटन’ फिल्म, बोले- ‘असली दुश्मन पाकिस्तान नहीं चाइना है’

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दैनिक भास्कर

Jun 21, 2020, 05:05 AM IST

ज्योति शर्मा.

कई दिनों से लगातार भारत और चाइना की बॉर्डर पर विवाद चल रहा है। चाइना लगातार भारत की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है जिससे पूरे देश में हलचल है। डायरेक्टर जे पी दत्ता दो साल पहले ही अपनी फिल्म पलटन में इस मुद्दे को उठा चुके हैं। अब लगातार बढ़ते मामले को देख जे पी दत्ता ने भास्कर से इस बारे में खास बातचीत की है।

चाइना और भारत के बीच हो रही लड़ाई पर मैंने 2 साल पहले ही एक फिल्म बनाई थी। फिल्म में बताया गया है कि कैसे1962 मैं भारत ने चाइना को मुह तोड़ जवाब दिया था और सिक्किम को चाइना में जाने से बचाया था क्योंकि उनकी नजर सिक्किम पर थी। 1967 से ही चाइना की नजर ना केवल भारत पर, बल्कि दूसरे देशों पर भी कब्जा करने पर रही है। अगर आप देखिए तो एशिया के जो समंदर है उस पर भी वह कब्जा करना चाहते हैं, ताइवान भी लेना चाहते हैं। अगर चाइना वालों को मैप बनाने कहा जाए तो वह पूरे एशिया को अपने आप में शामिल कर लेंगे। जापान तक को वो अपना होने का दावा करेंगे। 

पाकिस्तान नहीं चायना है दुश्मन

हमने 62 के बाद से ही चाइना की तरफ एक बहुत ही डिप्लोमेट, बहुत ही डरा हुआ एटीट्यूड रखा है जो कि बहुत ही अफसोस की बात है। क्योंकि हमने इन्हें बहुत ही हल्के में लिया है, हमें ऐसा लगता आया है वो हमारे दुश्मन नहीं है। इतना ही नहीं हमारी आम जनता को भी ऐसा लगता है कि चाइना हमारा दुश्मन नहीं है। बल्कि हमारा दुश्मन पाकिस्तान है। लेकिन हकीकत में असली ड्रैगन जो है वह चाइना ही है। चाइना का केवल एक ही मकसद है, पूरी दुनिया पर राज करना। यही कारण है कि चाइना ने पूरी दुनिया के साथ बायोलॉजिकल लड़ाई शुरू की है  जिसका नाम कोरोना है।

ये कभी अपनी जुबान पर नहीं टिके

जिस तरह से चाइना ने गलवान में हमारे सैनिकों पर हमला किया है, और इतने दिनों से किया जा रहा है। एग्रीमेंट करने के बावजूद इन्होंने ये हरकत की है। ये सभी को पता है कि चाइनीज कभी भी अपनी जुबान पर नही टिके है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि हम कभी भी किसी की जमीन पर नजर नहीं रखते और इसका फायदा हमेशा से चाइना ने उठाया है। 1967 से लेकर 2020 तक हमारा एटीट्यूड चाइना की ओर नही बदला है लेकिन इस घटना के बाद अब बदलने की जरूरत है। पिछले दो-तीन सालों से भारतीय चाइना के खिलाफ हैं यहां तक कि उनके सामान को भी बॉयकॉट करने की कोशिश कर रहे हैं। 

इस मुद्दे पर बनी फिल्म का उड़ाया गया मजाक

मैं नहीं मानता आम जनता चाइना के खिलाफ है, या उन्हें कुछ समझ में आती है चाइना की राजनीति। जब मैंने अपनी फिल्म ‘पलटन’ रिलीज की थी तो लोगों और मीडिया ने उसका मजाक उड़ाया था। काफी कुछ उटपटांग लिखा गया था अगर मैं फिल्म के एक सीन की बात करूं जिसमें फैक्ट दिखाया गया है जो असल में हुआ है। क्योंकि जो सीन दिखाया गया है उस सीन के बारे में जो रियल आर्मी ऑफिसर्स है उनसे बात करके उस सीन को फिल्माया गया था। पलटन बहुत ही ओरिजिनल और एक रियलिस्टिक फिल्म है। लेकिन जब हम चाइना को दुश्मन मानते ही नहीं तो क्यों इस फिल्म को सही मानेंगे।

आज अचानक से जाग गए हैं लोग ट्विटर पर देखता हूं तो लोग कमेंट कर रहे हैं, बातें लिख रहे हैं, कुछ लोग मुझे पलटन को एक बार फिर रिलीज करने के लिए कह रहे हैं। मुझे तो यह समझ नहीं आ रहा क्या हमारा देश मुर्गा परस्त है क्या?  जब तक इंसान की जान नहीं जाएगी तब तक उन्हें समझ नहीं आएगा क्या  ? 

हमने चाइना को मजबूत बनने का मौका दिया

मुझे नहीं लगता की चाइना सामान बॉयकॉट करने से सुधरने वाला है। उसे यह कभी नहीं लगेगा कि हमारे बिजनेस को बॉयकॉट कर हमें कमजोर बनाने की कोशिश करने में बहुत ताकतवर हैं।  उसे इन सब चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। अगर हम उन्हें बॉयकॉट करेंगे तब भी कई ऐसे देश है जो चाइना के साथ डील करते हैं और उनके साथ खड़े है। यह हमारी गलती है कि हमने चाइना को मजबूत बनने का मौका दिया।

कई साल पहले डिफेंस मिनिस्टर जॉर्ज फर्नांडिस ने एक स्टेटमेंट दिया था कि हमारा दुश्मन चाइना है, ना कि पाकिस्तान। उस वक्त उन पर हम हंस रहे थे लेकिन उन्होंने सच कहा था। बस यह था कि हमारे देश में अगर पहले से आगाह कर दिया जाए तो लोग उसे बेवकूफ समझते हैं। और जब आज बात सामने आई है तब लोगों को समझ आ रहा है।

चाइना अमेरिका जैसे देश पर भी कब्जा करने की कोशिश कर रहा है तो हम तो उसके पीछे हैं। इस वक्त इंटरनेशनल कम्युनिटी से बात कर चाइना को समझाने की जरूरत है, और जो गलतियां बार-बार कर रहा है उसे एक वार्निंग देने की सख्त जरूरत है। जिस तरह कोरोना को लेकर सभी देश एकजुट होकर चाइना के खिलाफ खड़े हैं, और उसे जवाब देने के लिए मजबूर कर रहे थे। आखिर ये बीमारी आई कैसे ? और इतनी बड़ी तादाद में फैली कैसे? चाइना डर गया है क्योंकि अब यह मामला इंटरनेशनल जस्टिस कोर्ट में जा चुका है। चाइना इतना बौखला गया है कि उसने उसकी भड़ास हिंदुस्तान पर निकाल दी है। 

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China: International Yoga Day was celebrated in low-key events due to COVID-19, standoff with India – भारत के साथ तनाव, COVID-19 की वजह से चीन में सादगी से मना अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

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भारत के साथ तनाव, COVID-19 की वजह से चीन में सादगी से मना अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

चीन में इस बार सादगी से मनाया गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

बीजिंग :

कोरोनावायरस (coronavirus) और भारत के साथ एलएसी पर तनाव की वजह से चीन में अतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) इस बार बहुत ही सादगी से मनाया गया. चीन में योग काफी लोकप्रिय है. संयुक्त राष्ट्र ने साल 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी. इसके बाद चीन में योग दिवस के मौके पर आमतौर पर कई बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.  

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इस साल, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मुख्य कार्यक्रम का आयोजन इंडिया हाउस में किया गया. कार्यक्रम की अगवाई चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिस्री ने की. इस दौरान, भारतीय और विदेशी राजनयिकों के साथ उनके परिवार ने शिरकत की. मिस्री ने कहा कि इस साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस “चुनौतियों से भरा” रहा. उन्होंने बताया, “चुनौतियों के बावजूद हमने थोड़ा बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित करने का सोचा था लेकिन बीजिंग में कोरोना महामारी फिर से फैलने से हमें अपनी योजना टालकर छोटा कार्यक्रम करना पड़ा.”  

चीन में पिछले कुछ हफ्तों में कोरोना के नए मामले सामने आए हैं. इससे पहले चीन ने कोरोनावायरस पर पूरी तरह से काबू करने की बात कही थी. एनएचसी ने शनिवार को कहा कि चीन में अब तक कोरोना के 83,352 मामले दर्ज किए गए जबकि 4,634 लोगों की मौत हुई है. 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन में कुछ योग एसोसिएशनों ने योग दिवस के मौके पर कार्यक्रम आयोजित किए.

चीन में योग कार्यक्रमों के छोटे पैमाने पर आयोजित करने की एक वजह भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प भी है. सैन्य झड़प की वजह से भारत और चीन सरहद पर तनाव और ज्यादा बढ़ गया है. चीन के साथ झड़प में 20 भारतीय जवान की जान गई थी. कहा जा रहा है कि इस झड़प में चीन को जानी नुकसान हुआ है.   

वीडियो: ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ पर देशभर के लोगों ने किया योग

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Delhi To Conduct Serological Survey From June 27 To Curb Spread Of COVID

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गृहमंत्री ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिए कि जिला स्तरीय टीम बनाई जाए और कंटेनमेंट जोन में सर्वे का काम 30 जून तक पूरा हो जाना चाहिए.

नई दिल्ली: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिल्ली में कोरोना कंटेनमेंट रणनीति पर डॉ. पॉल समिती की रिपोर्ट पर चर्चा हुई. गृह मंत्रालय ने बताया, पूरी दिल्ली में 27 जून से 10 जुलाई के बीच एक सेरोलॉजिकल सर्वे कराया जाएगा, जिसमें 20 हजार लोगों की सैंपल टेस्टिंग होगी. इसके द्वारा दिल्ली में संक्रमण के फैलाव का आंकलन हो सकेगा और एक व्यापक रणनीति निर्धारित की जा सकेगी.

दिल्ली के हर जिले को एक बड़े अस्पताल से जोड़ा जाएगा. दिल्ली सरकार 22 जून तक एक योजना निर्धारित करेगी, 23 जून तक जिला स्तरीय टीमों का गठन होगा, 26 जून तक सभी कंटेनमेंट जोन्स का संशोधित परिसीमन किया जाएगा, 30 जून तक कंटेनमेंट जोन्स का सर्वे होगा.

होम आइसोलेशन की केंद्र सरकार को देनी होगी रिपोर्ट

दिल्ली सरकार हर मृतक का आंकलन कर बताएगी कि उसे कितने दिन पहले कहां से अस्पताल लाया गया था. अगर मरीज होम आइसोलेशन में था, तो उसे सही समय पर लाया गया था या नहीं. सभी कोरोना पॉजिटिव मामलों को पहले कोरोना सेंटर जाना होगा और जिन लोगों के घरों में सही व्यवस्था है और जो किसी अन्य को-मोरबिडिटी से ग्रस्त नहीं है उन्हें होम आइसोलेशन में रखा जाए. कितने लोगों को होम आइसोलेशन में रखा गया है, इसकी जानकारी भारत सरकार को देनी होगी.

कंटेनमेंट जोन्स का नए सिरे से परिसीमन

डॉ. पॉल समिती ने रिपोर्ट में कंटेनमेंट जोन्स का नए सिरे से परिसीमन, इनकी सीमा पर और इनके अंदर की गतिविधियों पर सख्ती से निगरानी और नियंत्रण का सुझाव दिया गया. इसके अलावा सभी संक्रमित व्यक्तियों की कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग और क्वारंटाइनिंग करने के लिए आरोग्य सेतु और इतिहास एप के इस्तेमाल का भी सुझाव दिया गया. कंटेनमेंट जोन्स के बाहर हर घर की लिस्ट लगाने पर भी चर्चा हुई. कोविड मरीजों को अस्पताल, कोविड सेंटर या होम आइसोलेशन में रखने का निर्देश दिया गया.

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Coronavirus: दिल्ली में 3000 नए केस और 63 लोगों की मौत, एक दिन में 1719 मरीज ठीक हुए

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Bollywood News In Hindi : Amrish Puri himself designed the costume for the role of Mogambo, Director Bonnie Kapoor gave Rs 10,000 as bonus | मोगैंबो के किरदार के लिए अमरीश पुरी ने खुद डिजाइन की थी कॉस्ट्यूम, डायरेक्टर बोनी कपूर ने इम्प्रेस होकर दिए थे 10 हजार रुपए

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दैनिक भास्कर

Jun 22, 2020, 05:00 AM IST

उमेश कुमार उपाध्याय.

बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर अमरीश पुरी भले ही अब इस दुनिया में ना हों मगर उन्होंने अपने किरदारों को हमेशा के लिए अमर कर दिया है। मिस्टर इंडिया का मोगैंबो हो या डीडीएलजे के बाबूजी अमरीश ने अपनी एक्टिंग से किरादरों में चार चांद लगाए हैं। आज अमरीश जी के जन्मदिन के खास मौके पर उनके दोस्त बोनी कपूर ने भास्कर से बातचीत में उनसे जुड़े खास किस्से शेयर किए हैं।

हम पांच के लिए खुद डिजाइन की थी बिग

अमरीश पुरी को बड़ी स्टारडम मेरी फिल्म हम पांच से मिली। वे अपने काम को लेकर इतने डेडीकेटेड थे कि हर चीज की डिटेल्स में जाते थे। इस फिल्म में अमरीश जी ने अपनी बिग खुद ही डिजाइन की थी। निर्देशक बापू जी ने उन्हें इशारों में कुछ बताया और स्केच बनाकर दिया था। उसके बाद तो उन्होंने अपनी बिग खुद ही डिजाइन की।

फिल्म हिट होने पर दिया 10 हजार रुपए बोनस

हम पांच के लिए अमरीश पुरी को 40 हजार रुपए फीस दी गई थी। फिल्म हिट होने के बाद उन्हें बोनस के रूप में 10 हजार रुपए और दिया तो खुश हो गए। उस समय प्राण और बाकी विलेन 3 लाख रुपए लिया करते थे। मैंने उनसे पिक्चर बनते समय कहा था कि इसके बाद आपकी प्राइस बढ़कर ढाई लाख रुपए हो जाएगी। हम पांच से पहले भी उन्होंने पिक्चरों में रोल किया था, पर हम पांच से जो स्टारडम और पहचान मिली, वह अब तक के किए गए सभी किरदारों से कहीं ज्यादा थी। इस तरह हमारा साथ शुरू हुआ।

मिस्टर इंडिया में अमरीश से पहले कई एक्टर का लिया था ऑडिशन

मिस्टर इंडिया के लिए हम फ्रेश फेस देना चाह रहे थे।  इसके लिए मुंबई में जितने भी विलेन थे, उन सभी के ऑडिशन लिए थे। लेकिन जावेद ने जिस रुवाब से मोगैंबो के किरदार को लिखा था, उस पर कोई सही उतर नहीं पा रहा था तो हमने फाइनली अमरीश पुरी जी को ही लेना सही समझा। उस समय वे बहुत बिजी चल रहे थे। हमने उनसे कहा कि मुझे अगले हफ्ते से आपके 60 दिन चाहिए, क्योंकि पूरे क्लाइमैक्स के लिए आर के स्टूडियो में हमारे कुल 5 सेट लगे थे। उन्होंने तुरंत हां बोल दिया। 

दरअसल जब एक्टर्स पास जाते हैं तो वह कहते हैं कि सोचेंगे, करेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने इसके बारे में बहुत सुना है और मैं खुश हूं कि तुम फाइनली मेरे पास आ गए। मैं जो भी डेट होगी आपकी उससे मैच करूंगा। इस तरह हमने शूटिंग शुरू की और बड़े विलेन के रूप में अमरीश पुरी का एक नया चेहरा सामने आया। हमने हम पांच में भी उन्हें इसीलिए लिया था कि यह एक फ्रेश फेस हैं। शोले में जब अमजद खान लाॉन्च हुए थे, वह भी बिल्कुल फ्रेश फेस थे।

मोगैंबो के लिए खुद डिजाइन करवाए कॉस्टयूम

हमने अमरीश पुरी को मोगैंबो तो बना लिया था, पर हमारे दिमाग में उसकी कॉस्टयूम और गेटअप क्लीयर नहीं था। पूरा गेटअप बनाने में अमरीश पुरी का बड़ा हाथ रहा। अपने खास टेलर माधव के साथ मिलकर अमरीश ने पूरा गेटअप डिजाइन बनवाया। मैं उस कॉस्टयूम से इतना प्रभावित हुआ था कि मैंने उनके डिजाइनर माधव को उस समय 10 हजार रुपए बोनस में दिए। हमारे मन में विलेन का किरदार तो था, पर क्लियर विजुअल नहीं था। इसे अमरीश जी ने खुद बनाया। बिग, कॉस्टयूम, हाथ में ली हुई छड़ी सब अमरीश ने खुद ही माधव के साथ डिजाइन की थी।

मोगैंबो के लिए किया खूब रिहर्सल 

अमरीश पुरी की आदत थी, जब उन्हें रोल भा जाता था, तब वह हर चीज की डिटेलिंग में जाते थे और मोगैंबो की हर डिटेलिंग में जाकर उन्होंने कमाल का काम किया। इस किरदार को जीवंत करने के लिए उन्होंने खूब रिहर्सल की थी। उन्होंने हर डायलॉग जावेद जी के साथ बैठकर पढ़ा था साथ ही सेट पर शेखर ने भी उनसे रिहर्सल्स करवाई। उन्होंने हर चीज के लिए बहुत ज्यादा कड़ी मेहनत की थी।

पूरा क्रेडिट में अमरीश पुरी को देना चाहूंगा

हीरो बड़ा तब होता है, जब सामने विलेन टक्कर का हो। मिस्टर इंडिया के सामने हमें बड़ा विलेन चाहिए था और मैं नहीं समझता कि अमरीश पुरी से बड़ा विलेन कोई हो सकता है। इसका पूरा क्रेडिट मैं अमरीश पुरी को देना चाहूंगा। खैर, लाइन तो जावेद जी ने लिखी थी- मोगेंबो खुश हुआ। यह तकिया कलाम लोग आज तक याद करते हैं, पर इस किरदार में चार चांद अमरीश पुरी ने अपनी मेहनत से लगाए थे।

मोगैंबो की कामयाबी से मिली और फिल्में

मिस्टर इंडिया के बाद हमने विरासत में उनके साथ काम किया। इस पूरे प्रोजेक्ट का सेटअप मैंने किया था। इसमें फिर अमरीश जी ने पॉजिटिव रोल किया था और कमाल का काम किया था। साथ ही मिस्टर इंडिया के बाद उन्होंने उनकी हॉलीवुड की पहली फिल्म की, साथ ही साउथ के भी नंबर वन विलेन हो गए थे। वे वहां की भी बड़ी फिल्मों में विलेन हुआ करते थे। यह सब मोगैंबो पर की हुई उनकी मेहनत की वजह से था।

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