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223 साल की हुई साइकिल; रिसर्च कहती है कि इसे चलाने से इम्यूनिटी बढ़ती है, 1 घंटे में 71 ग्राम वजन कम होता है

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आजवर्ल्ड बाइसिकल डे है। कोरोना के इस संकट काल में जब सारे पहिये लगभग थम गए, तो लोगों को साइकिल फिर से अच्छी लगने लगी। अमेरिका जैसे देश में जहां बीते दो महीनों मेंइसकी बिक्री दुगुनी हो गई।भारत में सैकड़ों मजदूर शहरों की बेदर्दी से परेशान होकर अपनेगांवों की ओर साइकिल पर ही निकल पड़े।

बिहार की बेटी ज्योतिअपने पिता को लेकर हजार किलोमीटर निकलपड़ी ताे कहीं पूरा परिवार ही साइकिल पर नजर आया।

इतिहास के पन्नों में सुविधा वाली साइकिल

ये तो हुई आज की बात, लेकिन साइकिल का सफर223 साल पुरानाहो चुका है।साइकिल बनाने के पीछे पहली सोच साधन और सुविधा की थी जो अब सेहत से जुड़ गई है। 1817 में पहली बार जर्मन ड्यूक शासक की सेवा में लगे एक सरकारी अफसरकार्ल वॉन ड्रैस ने दुनिया की पहली दो पहिया साइकिल बनाई थी। इसे ही बाइसिकल कहा गया और उस वक्त नाम दिया गया – ड्रैसिनी। इसका मतलब था एक हल्का वाहन जो आपको बिना मोटर के एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा सके।

कुछ इस तरह की थी पहली साइकिल। इसमें न तो चेन थी और न पेैडल। चलाने वाले को पैरों की मदद से पहियों को गति देनी पड़ती थी।

अब बात सेहत की

साइकिल का रूप भले बदल गया हो, पर आज भी इसका कोईविकल्प नहीं। विश्व स्वास्थ्य संगठन से लेकर तमाम रिसर्च बताती हैं किरोजाना 30-40 मिनट की साइक्लिंग शरीर को फिट बनाकर तन और मन दोनों की परेशानियोंसे छुटाकारा दिला सकती है।

साइक्लिंग से कॉर्टिसोल का लेवल बढ़ता है

अच्छी बात ये है कि साइकिल चलाने से शरीर में फील गुड कराने वाले हैप्पीनेस हार्मोन कॉर्टिसोल का लेवल भी बढ़ता है। शरीर की चर्बी गलाने में तो ये कमाल करती है और आप इसकी मदद से महीने भर में लगभग दो किलो तक वजन कम कर सकते हैं।

आज के दिन की बात करें तो,यूनाइटेड नेशंस की जनरल असेम्बली ने 12 अप्रैल, 2018 को एक रेजोल्यूशन पास किया। फैसला हुआ कि सभी सदस्य देश हर साल 3 जून को वर्ल्ड बाइसिकल डे मनाएंगे।

2019 के वर्ल्ड बाइसिकल डे के इवेंट में फैशन मॉडल भव्या मोंगा। इस साल कोरोना लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के कारण इस तरह की इवेंट नहीं पा रहे हैं।

कोरोना अनलॉकडाउन शुरू हो गया, लेकिन अपनी आदत को बनाए रख करअब आगे साइकिल चलानेसे क्या फायदे हो सकते हैं, बता रही हैंफिटनेस एक्सपर्ट नेहा शाह –

1. नहीं होगा जोड़ों का दर्द
नियमित साइकिल चलाने का सबसे बड़ा फायदा है कि जोड़ों का दर्द काफी हद तक कम हो जाता है। हालांकि, इसके लिए जरूरी है कि साइक्लिंग के वक्त यह ध्यान रखें कि आपके जोड़90 डिग्री पर मूव हो रहे हों।

2. एंजाइटी- डिप्रेशन से मुक्ति
साइक्लिंग के सिर्फ शारीरिक फायदे नहीं हैं। बल्कि, मानसिक तौर पर भी साइकिल के कई फायदे हैं। अगर आप डिप्रेशन या एंजाइटी से परेशान हैं, तो साइक्लिंग शुरू कर दें।

3. हार्टअटैक का खतरा कम
रेगुलर साइक्लिंगकरने से हार्ट अटैक, एबनॉर्मल हार्ट रिदम्स, हार्ट फेलियर जैसी कार्डियोवस्क्यूलरडिसीज का खतरा भी न के बराबर होता है।

दुनियाभर में लाखों साइकिल क्लब चल रहे हैं क्योंकि साइकिल चलाने से दोस्ती भी मजबूत होती है।

4.साइक्लिंग से इम्युनिटी क्योंबढ़ती है ?
2018 में जर्नल द एजिंग सेल में छपीरिसर्चरिपोर्ट्स में यह सामने आया है कि साइकिल चलाने वालोंकी इम्युनिटी पॉवर अन्य लोगों की तुलना में अधिक होती है। जब हम सुबह-सुबह खुली हवा में साइक्लिंग करते हैं तो शरीर ठंड का सामना करता है। थोड़ी देर बाद शरीर गर्म होता है और फिर अत्याधिक गर्मी भी झेलता है। ठंड और गर्मी झेलने कीयह प्रक्रिया शरीर की टी-सेल्स को ताकत देती है और हम मौसम के साथ बीमारियों के प्रति भीज्यादा ताकतवर बन जाते हैं।

5. अन्य वर्कआउट से बेहतर क्यों है साइक्लिंग ?
साइकिल चलाने की उपयोगिता बताते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम के एजिंग इंस्टीट्यूट के प्रो जैनेट लॉर्ड कहते हैं कि साइकिल चलाने से बॉडी फैट और कोलेस्टेरॉल का लेवल ठीक बना रहता है और आप खुद को जवानमहसूस करते हैं।

स्वीमिंग, जिम, रनिंग जैसे वर्कआउट के कई माध्यम हैं। लेकिन, साइक्लिंग करना इन सबसे बेहतर इसलिए है क्योंकि यह आपके रुटीन में आसानी से फिट हो जाता है। उदाहरण के लिए जिम, स्वीमिंग पूल, स्पोर्ट्स के लिए आपको अलग से समय निकालना होता है। जबकि साइक्लिंग आप ऑफिस, बाजार, स्कूल, कॉलेज जाते वक्त भी कर सकते हैं।

6. क्या साइक्लिंग के दौरान मास्क जरूरी है ?
अगर इनडोर साइक्लिंग कर रहे हैं तो मास्क की जरूरत नहीं है। लेकिन, यदि ऐसे खुली जगह मेंसाइक्लिंग कर रहे हैं जहां भीड़ हैतो मास्क पहनना जरूरी है।

7. कितनी देर साइक्लिंग करनी चाहिए?
यह रुटीन पर निर्भर करता है। अगर आप कोई अन्य फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते हैं तो कम से कम सप्ताह में 5 दिन (रोज 40 मिनट) साइक्लिंग करना जरूरी है। वहीं अगर आप जिम या किसी तरह का दूसरा वर्कआउट करते हैं तो 15 मिनट साइक्लिंग करना भीकाफी है।

8. साइक्लिंग का कैलोरी कनेक्शन ?
साइक्लिंग कासबसे बड़ा फायदा कैलोरी बर्न करना और वेट लॉस ही माना जाता है। रिसर्च डेटा से पता चलता है कि एक साल तक सप्ताह के 6 दिन साइकिल चलाने से आप करीब 2 लाख कैलोरी जला सकते हैं। इतनी कैलोरी करीब 26 किलो वजन कम करने के बराबर होती है।

इसे दिन और वजन के हिसाब से देखें तो 80 किलो का एक व्यक्ति हर रोज एक घंटा साइकिल चलाकर 650 कैलोरी घटा सकता है, यानि आप हर दिन एक घंटा साइकिल चलाकर 71 ग्राम वजन घटा सकते हैं।

नीदरलैंड्समें 15 वर्ष से अधिक उम्र वाले आठ में से सात लोगों के पास खुद कीसाइकिल है।

दुनिया नीदरलैंड्स से सीखें साइकिल चलाना

  • नीदरलैंड्स में साइकिल चलाना गर्व समझा जाता है और ये वहां की संस्कृति का हिस्सा है। डच राजधानी एम्सटर्डम को दुनिया की साइकिल कैपिटल भी कहा जाता है। यहां लगभग हर नागरिक के पास अपनी साइकिल है और पूरे देश में इसे चलाने के लिए अलग ट्रैक और पार्किंग की व्यवस्था है।
  • इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसपोर्ट पॉलिसी एनालिसिस की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 40% लोग छुट्टी के दिनों में साइकिल इस्तेमाल करते हैं। नीदरलैंड्स में कुल ट्रिप्स में से 30% ट्रिप्स साइकिल से की जाती हैं, जबकि दुनिया के दूसरे देशों में यह मात्र 1 से 5 फीसदी तक है।
  • नीदरलैंड्स के 11 बड़े नौकरी देने वाले संस्थानसाइक्लिंग की आदतको बढ़ावा देने के लिए साइकिलों को फाइनेंस भी करते हैं। दो साल पहले यहां केउट्रेच शहर में दुनिया की सबसे बड़ी साइकिल पार्किंग तैयार हो गई है। इस तीन मंजिला पार्किंग में 12500 साइकिलें पार्क करने की जगह है।

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Bicycle help you in increasing Immune System to reduce depression.

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China: International Yoga Day was celebrated in low-key events due to COVID-19, standoff with India – भारत के साथ तनाव, COVID-19 की वजह से चीन में सादगी से मना अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

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भारत के साथ तनाव, COVID-19 की वजह से चीन में सादगी से मना अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

चीन में इस बार सादगी से मनाया गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

बीजिंग :

कोरोनावायरस (coronavirus) और भारत के साथ एलएसी पर तनाव की वजह से चीन में अतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) इस बार बहुत ही सादगी से मनाया गया. चीन में योग काफी लोकप्रिय है. संयुक्त राष्ट्र ने साल 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी. इसके बाद चीन में योग दिवस के मौके पर आमतौर पर कई बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.  

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इस साल, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मुख्य कार्यक्रम का आयोजन इंडिया हाउस में किया गया. कार्यक्रम की अगवाई चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिस्री ने की. इस दौरान, भारतीय और विदेशी राजनयिकों के साथ उनके परिवार ने शिरकत की. मिस्री ने कहा कि इस साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस “चुनौतियों से भरा” रहा. उन्होंने बताया, “चुनौतियों के बावजूद हमने थोड़ा बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित करने का सोचा था लेकिन बीजिंग में कोरोना महामारी फिर से फैलने से हमें अपनी योजना टालकर छोटा कार्यक्रम करना पड़ा.”  

चीन में पिछले कुछ हफ्तों में कोरोना के नए मामले सामने आए हैं. इससे पहले चीन ने कोरोनावायरस पर पूरी तरह से काबू करने की बात कही थी. एनएचसी ने शनिवार को कहा कि चीन में अब तक कोरोना के 83,352 मामले दर्ज किए गए जबकि 4,634 लोगों की मौत हुई है. 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन में कुछ योग एसोसिएशनों ने योग दिवस के मौके पर कार्यक्रम आयोजित किए.

चीन में योग कार्यक्रमों के छोटे पैमाने पर आयोजित करने की एक वजह भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प भी है. सैन्य झड़प की वजह से भारत और चीन सरहद पर तनाव और ज्यादा बढ़ गया है. चीन के साथ झड़प में 20 भारतीय जवान की जान गई थी. कहा जा रहा है कि इस झड़प में चीन को जानी नुकसान हुआ है.   

वीडियो: ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ पर देशभर के लोगों ने किया योग

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Delhi To Conduct Serological Survey From June 27 To Curb Spread Of COVID

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गृहमंत्री ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिए कि जिला स्तरीय टीम बनाई जाए और कंटेनमेंट जोन में सर्वे का काम 30 जून तक पूरा हो जाना चाहिए.

नई दिल्ली: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिल्ली में कोरोना कंटेनमेंट रणनीति पर डॉ. पॉल समिती की रिपोर्ट पर चर्चा हुई. गृह मंत्रालय ने बताया, पूरी दिल्ली में 27 जून से 10 जुलाई के बीच एक सेरोलॉजिकल सर्वे कराया जाएगा, जिसमें 20 हजार लोगों की सैंपल टेस्टिंग होगी. इसके द्वारा दिल्ली में संक्रमण के फैलाव का आंकलन हो सकेगा और एक व्यापक रणनीति निर्धारित की जा सकेगी.

दिल्ली के हर जिले को एक बड़े अस्पताल से जोड़ा जाएगा. दिल्ली सरकार 22 जून तक एक योजना निर्धारित करेगी, 23 जून तक जिला स्तरीय टीमों का गठन होगा, 26 जून तक सभी कंटेनमेंट जोन्स का संशोधित परिसीमन किया जाएगा, 30 जून तक कंटेनमेंट जोन्स का सर्वे होगा.

होम आइसोलेशन की केंद्र सरकार को देनी होगी रिपोर्ट

दिल्ली सरकार हर मृतक का आंकलन कर बताएगी कि उसे कितने दिन पहले कहां से अस्पताल लाया गया था. अगर मरीज होम आइसोलेशन में था, तो उसे सही समय पर लाया गया था या नहीं. सभी कोरोना पॉजिटिव मामलों को पहले कोरोना सेंटर जाना होगा और जिन लोगों के घरों में सही व्यवस्था है और जो किसी अन्य को-मोरबिडिटी से ग्रस्त नहीं है उन्हें होम आइसोलेशन में रखा जाए. कितने लोगों को होम आइसोलेशन में रखा गया है, इसकी जानकारी भारत सरकार को देनी होगी.

कंटेनमेंट जोन्स का नए सिरे से परिसीमन

डॉ. पॉल समिती ने रिपोर्ट में कंटेनमेंट जोन्स का नए सिरे से परिसीमन, इनकी सीमा पर और इनके अंदर की गतिविधियों पर सख्ती से निगरानी और नियंत्रण का सुझाव दिया गया. इसके अलावा सभी संक्रमित व्यक्तियों की कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग और क्वारंटाइनिंग करने के लिए आरोग्य सेतु और इतिहास एप के इस्तेमाल का भी सुझाव दिया गया. कंटेनमेंट जोन्स के बाहर हर घर की लिस्ट लगाने पर भी चर्चा हुई. कोविड मरीजों को अस्पताल, कोविड सेंटर या होम आइसोलेशन में रखने का निर्देश दिया गया.

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दिल्ली: जानें किस प्राइवेट अस्पताल में कितने बेड पर मिल सकेगा कोरोना का सस्ता इलाज, सर्कुलर जारी

Coronavirus: दिल्ली में 3000 नए केस और 63 लोगों की मौत, एक दिन में 1719 मरीज ठीक हुए

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Bollywood News In Hindi : Amrish Puri himself designed the costume for the role of Mogambo, Director Bonnie Kapoor gave Rs 10,000 as bonus | मोगैंबो के किरदार के लिए अमरीश पुरी ने खुद डिजाइन की थी कॉस्ट्यूम, डायरेक्टर बोनी कपूर ने इम्प्रेस होकर दिए थे 10 हजार रुपए

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दैनिक भास्कर

Jun 22, 2020, 05:00 AM IST

उमेश कुमार उपाध्याय.

बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर अमरीश पुरी भले ही अब इस दुनिया में ना हों मगर उन्होंने अपने किरदारों को हमेशा के लिए अमर कर दिया है। मिस्टर इंडिया का मोगैंबो हो या डीडीएलजे के बाबूजी अमरीश ने अपनी एक्टिंग से किरादरों में चार चांद लगाए हैं। आज अमरीश जी के जन्मदिन के खास मौके पर उनके दोस्त बोनी कपूर ने भास्कर से बातचीत में उनसे जुड़े खास किस्से शेयर किए हैं।

हम पांच के लिए खुद डिजाइन की थी बिग

अमरीश पुरी को बड़ी स्टारडम मेरी फिल्म हम पांच से मिली। वे अपने काम को लेकर इतने डेडीकेटेड थे कि हर चीज की डिटेल्स में जाते थे। इस फिल्म में अमरीश जी ने अपनी बिग खुद ही डिजाइन की थी। निर्देशक बापू जी ने उन्हें इशारों में कुछ बताया और स्केच बनाकर दिया था। उसके बाद तो उन्होंने अपनी बिग खुद ही डिजाइन की।

फिल्म हिट होने पर दिया 10 हजार रुपए बोनस

हम पांच के लिए अमरीश पुरी को 40 हजार रुपए फीस दी गई थी। फिल्म हिट होने के बाद उन्हें बोनस के रूप में 10 हजार रुपए और दिया तो खुश हो गए। उस समय प्राण और बाकी विलेन 3 लाख रुपए लिया करते थे। मैंने उनसे पिक्चर बनते समय कहा था कि इसके बाद आपकी प्राइस बढ़कर ढाई लाख रुपए हो जाएगी। हम पांच से पहले भी उन्होंने पिक्चरों में रोल किया था, पर हम पांच से जो स्टारडम और पहचान मिली, वह अब तक के किए गए सभी किरदारों से कहीं ज्यादा थी। इस तरह हमारा साथ शुरू हुआ।

मिस्टर इंडिया में अमरीश से पहले कई एक्टर का लिया था ऑडिशन

मिस्टर इंडिया के लिए हम फ्रेश फेस देना चाह रहे थे।  इसके लिए मुंबई में जितने भी विलेन थे, उन सभी के ऑडिशन लिए थे। लेकिन जावेद ने जिस रुवाब से मोगैंबो के किरदार को लिखा था, उस पर कोई सही उतर नहीं पा रहा था तो हमने फाइनली अमरीश पुरी जी को ही लेना सही समझा। उस समय वे बहुत बिजी चल रहे थे। हमने उनसे कहा कि मुझे अगले हफ्ते से आपके 60 दिन चाहिए, क्योंकि पूरे क्लाइमैक्स के लिए आर के स्टूडियो में हमारे कुल 5 सेट लगे थे। उन्होंने तुरंत हां बोल दिया। 

दरअसल जब एक्टर्स पास जाते हैं तो वह कहते हैं कि सोचेंगे, करेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने इसके बारे में बहुत सुना है और मैं खुश हूं कि तुम फाइनली मेरे पास आ गए। मैं जो भी डेट होगी आपकी उससे मैच करूंगा। इस तरह हमने शूटिंग शुरू की और बड़े विलेन के रूप में अमरीश पुरी का एक नया चेहरा सामने आया। हमने हम पांच में भी उन्हें इसीलिए लिया था कि यह एक फ्रेश फेस हैं। शोले में जब अमजद खान लाॉन्च हुए थे, वह भी बिल्कुल फ्रेश फेस थे।

मोगैंबो के लिए खुद डिजाइन करवाए कॉस्टयूम

हमने अमरीश पुरी को मोगैंबो तो बना लिया था, पर हमारे दिमाग में उसकी कॉस्टयूम और गेटअप क्लीयर नहीं था। पूरा गेटअप बनाने में अमरीश पुरी का बड़ा हाथ रहा। अपने खास टेलर माधव के साथ मिलकर अमरीश ने पूरा गेटअप डिजाइन बनवाया। मैं उस कॉस्टयूम से इतना प्रभावित हुआ था कि मैंने उनके डिजाइनर माधव को उस समय 10 हजार रुपए बोनस में दिए। हमारे मन में विलेन का किरदार तो था, पर क्लियर विजुअल नहीं था। इसे अमरीश जी ने खुद बनाया। बिग, कॉस्टयूम, हाथ में ली हुई छड़ी सब अमरीश ने खुद ही माधव के साथ डिजाइन की थी।

मोगैंबो के लिए किया खूब रिहर्सल 

अमरीश पुरी की आदत थी, जब उन्हें रोल भा जाता था, तब वह हर चीज की डिटेलिंग में जाते थे और मोगैंबो की हर डिटेलिंग में जाकर उन्होंने कमाल का काम किया। इस किरदार को जीवंत करने के लिए उन्होंने खूब रिहर्सल की थी। उन्होंने हर डायलॉग जावेद जी के साथ बैठकर पढ़ा था साथ ही सेट पर शेखर ने भी उनसे रिहर्सल्स करवाई। उन्होंने हर चीज के लिए बहुत ज्यादा कड़ी मेहनत की थी।

पूरा क्रेडिट में अमरीश पुरी को देना चाहूंगा

हीरो बड़ा तब होता है, जब सामने विलेन टक्कर का हो। मिस्टर इंडिया के सामने हमें बड़ा विलेन चाहिए था और मैं नहीं समझता कि अमरीश पुरी से बड़ा विलेन कोई हो सकता है। इसका पूरा क्रेडिट मैं अमरीश पुरी को देना चाहूंगा। खैर, लाइन तो जावेद जी ने लिखी थी- मोगेंबो खुश हुआ। यह तकिया कलाम लोग आज तक याद करते हैं, पर इस किरदार में चार चांद अमरीश पुरी ने अपनी मेहनत से लगाए थे।

मोगैंबो की कामयाबी से मिली और फिल्में

मिस्टर इंडिया के बाद हमने विरासत में उनके साथ काम किया। इस पूरे प्रोजेक्ट का सेटअप मैंने किया था। इसमें फिर अमरीश जी ने पॉजिटिव रोल किया था और कमाल का काम किया था। साथ ही मिस्टर इंडिया के बाद उन्होंने उनकी हॉलीवुड की पहली फिल्म की, साथ ही साउथ के भी नंबर वन विलेन हो गए थे। वे वहां की भी बड़ी फिल्मों में विलेन हुआ करते थे। यह सब मोगैंबो पर की हुई उनकी मेहनत की वजह से था।

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