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पिता को समर्पित दो लघुकथा और एक कविता जो एक बार फिर आपको पापा के करीब ले जाएंगी

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लघुकथा :पापा ने बनायासकारात्मक

लेखक : माणिक राजेंद्र देव

पापा से बात करने के बाद यूं तो हर तरह का तनाव और चिंता नौ दो ग्यारह हो जाती है, परंतु कोरोना काल में इस बात का गहराई से अहसास हुआ। बच्चों के बाहर रहने और पति के बैंक में कार्यरत होने की वजह से पूरे लॉकडाउन में मुझे दिनभर घर में अकेले ही रहना पड़ा। छोटे शहर में एसबीआई की एक ही शाखा होने के चलते कुछ दिन काम बंद रखे जाने का विकल्प नहीं था।

टीवी पर कोरोना के मरीज़ों की बढ़ती संख्या देखकर मैं चिंताग्रस्त हो जाती। अकेले में चिंताएं बेलगाम होकर अधिक परेशान करती हैं। उस पर एक मां को तो जैसे ईश्वर ने ही चिंता करने का नैसर्गिक गुण प्रदान किया है। शाम को जब दिन भर मास्क की वजह से पति का सूजा चेहरा देखकर और सैनेटाइज़र की तेज़ गंध से परेशान हो जाती तो अनायास ही मन उन डॉक्टरों और नर्सों के प्रति श्रद्धानत हो जाता जो रात-दिन कोरोना मरीज़ों की जान बचाने में लगे हुए हैं। बैंक के बाहर तेज़ धूप में सरकार द्वारा भेजे रुपयों के लिए लगी मज़दूरों की लंबी लाइनें देखकर तो दिल कांप जाता।

पापा से बात करना मेरी दिनचर्या में शामिल है। मैंने अपनी मनःस्थिति कभी शेयर नहीं की, फिर भी पापा की बातें मेरी सोच को पूर्णतया बदलकर सकारात्मक कर देतीं। जैसे, सरकार ने कोरोना से निबटने के लिए अच्छी तैयारी की है या सरकार किसी को भूख से नहीं मरने देगी, कई समाजसेवी संस्थाएं भी इस कार्य में लगी हुई हैं। रोज़ स्वस्थ होकर घर लौटने वाले मरीज़ों की संख्या भी वे अवश्य बताते। कभी बच्चों से बात कर मुझे बताते कि वे सावधानीपूर्वक वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं और सुरक्षित हैं। न जाने क्यूं मैंं कभी इन सकारात्मक बातों पर ग़ौर ही नहीं कर पाई।

फिर एक दिन उनकी कॉलोनी में एक सज्जन कोरोना पॉज़िटिव निकले। हम सभी घबराने लगे परंतु पापा तब भी सकारात्मक ही सोचते रहे। सभी को समझाते कि वे तो अपनी मां को हॉस्पिटल ले गए थे, वहीं से उन्हें कोरोना हो गया। लक्षण दिखते ही स्वयं हॉस्पिटल चले गए और जल्द ही स्वस्थ होकर लौट आएंगे। उनकी बात सच साबित हुई। सच मंे ही कुछ ही दिनों में वे परिचित घर आ गए।

पापा सदैव समझाते कि हमारा आधा तनाव तो व्यवस्थित दिनचर्या का पालन करने और अपने काम समय पर करने से ही दूर हो जाता है। तनावरहित रहने से रोग प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ती है जो वर्तमान समय की महती आवश्यकता है। अपने शौक़ को ज़िंदा रखना भी हमें मानसिक रूप से स्वस्थ रखता है। इसीलिए आज भी टीवी, अख़बार के अलावा किताबें पढ़ना, लिखना, संगीत सुनना उनकी दिनचर्या के अंग हैं। इस प्रकार वे स्वयं की मिसाल से सभी को ‘स्वस्थ रहो, व्यस्त रहो, मस्त रहो’ की प्रेरणा देते हैं। फादर्स डे के अवसर पर पापा को प्रणाम।

लघुकथा…जन्म

लेखिका :माण्डवी बर्वे

एक तूफ़ानसा उठ रहा था जज़्बात का। वो जब थमा, तो झड़ी लग गई।

घोड़े की गति-सी भागती धड़कनें, तेज़ सांसें। कभी वो चहलक़दमी करने लगता, तो कभी बेंच पर बैठकर पैर हिलाने लगता, कभी भरी ठंड में भी माथे पर उभरे पसीने पर रुमाल फेरता। ऐसी बेचैनी, इतनी घबराहट कभी-भी महसूस नहीं की थी। बार-बार ऐसा लगता कि मानो आंखों से खारा पानी फूट पड़ेगा। हाथ प्रार्थना में जुड़ जाते। फिर कभी आंखें मूंद के ख़ुद को शांत करने की कोशिश करता।

तभी दरवाज़े की आवाज़ से वो झट उठ खड़ा हुआ। नर्स बाहर आई। उसने एक मुस्कान के साथ नरम रुई-सी नन्ही-सी जान को उसके हाथों में थमाते हुए कुछ कहा। उसकी नज़रें उस कोमल चेहरे पर टिककर रह गईं। नर्स के शब्द शायद सुनाई ही नहीं पड़े। अचानक धड़कनें, सांसें सब क़ाबू में आने लगीं। बेचैनी, घबराहट सब आंखों से फूटकर सुकून की धारा बन गईं। आज आंखों का ये खारा पानी मीठा-सा लग रहा था। आज एक और पिता का जन्म हुआ था।

कविता… पिता

लेखक :सन्नी डांगी चौधरी

लहर उठी विश्वास की

पिता खड़े जिस ओर,

लम्बी काली रात की

सदा रहे तुम भोर,

ऊपर से है सख़्त दिखे

मोम सा हृदय होय,

हर दुःख हंसकर सहे

भीतर-भीतर रोय।

लगन, मेहनत और परिश्रम

देते सदा सिखाय,

लगे सदा कड़वी सी बातें पर

जो माने सुख पाय।

अनबोला अनकहा है रिश्ता

तात तुम्हारे साथ,

तुम दे दो आशीष

जहां ख़ुशी हमारे हाथ।

आस तुम्हीं विश्वास तुम्हीं

तुम हो ईश्वर समान,

मन्दिर, मस्जिद, गिरजाघर में

भटक रहा इंसान।

जहां भर की दौलत से जो

न ख़रीदा जाय,

मात पिता का प्यार तो

बिना मोल मिल जाय,

जितनी जल्दी जाग सके

उतनी जल्दी जाग,

दोनों हाथ में समेट ले

यह मीठा अनुराग।

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Two short stories and a poem dedicated to father that will once again take you closer to Papa

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China: International Yoga Day was celebrated in low-key events due to COVID-19, standoff with India – भारत के साथ तनाव, COVID-19 की वजह से चीन में सादगी से मना अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

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भारत के साथ तनाव, COVID-19 की वजह से चीन में सादगी से मना अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

चीन में इस बार सादगी से मनाया गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

बीजिंग :

कोरोनावायरस (coronavirus) और भारत के साथ एलएसी पर तनाव की वजह से चीन में अतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) इस बार बहुत ही सादगी से मनाया गया. चीन में योग काफी लोकप्रिय है. संयुक्त राष्ट्र ने साल 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी. इसके बाद चीन में योग दिवस के मौके पर आमतौर पर कई बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.  

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इस साल, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मुख्य कार्यक्रम का आयोजन इंडिया हाउस में किया गया. कार्यक्रम की अगवाई चीन में भारत के राजदूत विक्रम मिस्री ने की. इस दौरान, भारतीय और विदेशी राजनयिकों के साथ उनके परिवार ने शिरकत की. मिस्री ने कहा कि इस साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस “चुनौतियों से भरा” रहा. उन्होंने बताया, “चुनौतियों के बावजूद हमने थोड़ा बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित करने का सोचा था लेकिन बीजिंग में कोरोना महामारी फिर से फैलने से हमें अपनी योजना टालकर छोटा कार्यक्रम करना पड़ा.”  

चीन में पिछले कुछ हफ्तों में कोरोना के नए मामले सामने आए हैं. इससे पहले चीन ने कोरोनावायरस पर पूरी तरह से काबू करने की बात कही थी. एनएचसी ने शनिवार को कहा कि चीन में अब तक कोरोना के 83,352 मामले दर्ज किए गए जबकि 4,634 लोगों की मौत हुई है. 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन में कुछ योग एसोसिएशनों ने योग दिवस के मौके पर कार्यक्रम आयोजित किए.

चीन में योग कार्यक्रमों के छोटे पैमाने पर आयोजित करने की एक वजह भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प भी है. सैन्य झड़प की वजह से भारत और चीन सरहद पर तनाव और ज्यादा बढ़ गया है. चीन के साथ झड़प में 20 भारतीय जवान की जान गई थी. कहा जा रहा है कि इस झड़प में चीन को जानी नुकसान हुआ है.   

वीडियो: ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ पर देशभर के लोगों ने किया योग

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Delhi To Conduct Serological Survey From June 27 To Curb Spread Of COVID

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गृहमंत्री ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिए कि जिला स्तरीय टीम बनाई जाए और कंटेनमेंट जोन में सर्वे का काम 30 जून तक पूरा हो जाना चाहिए.

नई दिल्ली: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में दिल्ली में कोरोना कंटेनमेंट रणनीति पर डॉ. पॉल समिती की रिपोर्ट पर चर्चा हुई. गृह मंत्रालय ने बताया, पूरी दिल्ली में 27 जून से 10 जुलाई के बीच एक सेरोलॉजिकल सर्वे कराया जाएगा, जिसमें 20 हजार लोगों की सैंपल टेस्टिंग होगी. इसके द्वारा दिल्ली में संक्रमण के फैलाव का आंकलन हो सकेगा और एक व्यापक रणनीति निर्धारित की जा सकेगी.

दिल्ली के हर जिले को एक बड़े अस्पताल से जोड़ा जाएगा. दिल्ली सरकार 22 जून तक एक योजना निर्धारित करेगी, 23 जून तक जिला स्तरीय टीमों का गठन होगा, 26 जून तक सभी कंटेनमेंट जोन्स का संशोधित परिसीमन किया जाएगा, 30 जून तक कंटेनमेंट जोन्स का सर्वे होगा.

होम आइसोलेशन की केंद्र सरकार को देनी होगी रिपोर्ट

दिल्ली सरकार हर मृतक का आंकलन कर बताएगी कि उसे कितने दिन पहले कहां से अस्पताल लाया गया था. अगर मरीज होम आइसोलेशन में था, तो उसे सही समय पर लाया गया था या नहीं. सभी कोरोना पॉजिटिव मामलों को पहले कोरोना सेंटर जाना होगा और जिन लोगों के घरों में सही व्यवस्था है और जो किसी अन्य को-मोरबिडिटी से ग्रस्त नहीं है उन्हें होम आइसोलेशन में रखा जाए. कितने लोगों को होम आइसोलेशन में रखा गया है, इसकी जानकारी भारत सरकार को देनी होगी.

कंटेनमेंट जोन्स का नए सिरे से परिसीमन

डॉ. पॉल समिती ने रिपोर्ट में कंटेनमेंट जोन्स का नए सिरे से परिसीमन, इनकी सीमा पर और इनके अंदर की गतिविधियों पर सख्ती से निगरानी और नियंत्रण का सुझाव दिया गया. इसके अलावा सभी संक्रमित व्यक्तियों की कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग और क्वारंटाइनिंग करने के लिए आरोग्य सेतु और इतिहास एप के इस्तेमाल का भी सुझाव दिया गया. कंटेनमेंट जोन्स के बाहर हर घर की लिस्ट लगाने पर भी चर्चा हुई. कोविड मरीजों को अस्पताल, कोविड सेंटर या होम आइसोलेशन में रखने का निर्देश दिया गया.

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दिल्ली: जानें किस प्राइवेट अस्पताल में कितने बेड पर मिल सकेगा कोरोना का सस्ता इलाज, सर्कुलर जारी

Coronavirus: दिल्ली में 3000 नए केस और 63 लोगों की मौत, एक दिन में 1719 मरीज ठीक हुए

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Bollywood News In Hindi : Amrish Puri himself designed the costume for the role of Mogambo, Director Bonnie Kapoor gave Rs 10,000 as bonus | मोगैंबो के किरदार के लिए अमरीश पुरी ने खुद डिजाइन की थी कॉस्ट्यूम, डायरेक्टर बोनी कपूर ने इम्प्रेस होकर दिए थे 10 हजार रुपए

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दैनिक भास्कर

Jun 22, 2020, 05:00 AM IST

उमेश कुमार उपाध्याय.

बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर अमरीश पुरी भले ही अब इस दुनिया में ना हों मगर उन्होंने अपने किरदारों को हमेशा के लिए अमर कर दिया है। मिस्टर इंडिया का मोगैंबो हो या डीडीएलजे के बाबूजी अमरीश ने अपनी एक्टिंग से किरादरों में चार चांद लगाए हैं। आज अमरीश जी के जन्मदिन के खास मौके पर उनके दोस्त बोनी कपूर ने भास्कर से बातचीत में उनसे जुड़े खास किस्से शेयर किए हैं।

हम पांच के लिए खुद डिजाइन की थी बिग

अमरीश पुरी को बड़ी स्टारडम मेरी फिल्म हम पांच से मिली। वे अपने काम को लेकर इतने डेडीकेटेड थे कि हर चीज की डिटेल्स में जाते थे। इस फिल्म में अमरीश जी ने अपनी बिग खुद ही डिजाइन की थी। निर्देशक बापू जी ने उन्हें इशारों में कुछ बताया और स्केच बनाकर दिया था। उसके बाद तो उन्होंने अपनी बिग खुद ही डिजाइन की।

फिल्म हिट होने पर दिया 10 हजार रुपए बोनस

हम पांच के लिए अमरीश पुरी को 40 हजार रुपए फीस दी गई थी। फिल्म हिट होने के बाद उन्हें बोनस के रूप में 10 हजार रुपए और दिया तो खुश हो गए। उस समय प्राण और बाकी विलेन 3 लाख रुपए लिया करते थे। मैंने उनसे पिक्चर बनते समय कहा था कि इसके बाद आपकी प्राइस बढ़कर ढाई लाख रुपए हो जाएगी। हम पांच से पहले भी उन्होंने पिक्चरों में रोल किया था, पर हम पांच से जो स्टारडम और पहचान मिली, वह अब तक के किए गए सभी किरदारों से कहीं ज्यादा थी। इस तरह हमारा साथ शुरू हुआ।

मिस्टर इंडिया में अमरीश से पहले कई एक्टर का लिया था ऑडिशन

मिस्टर इंडिया के लिए हम फ्रेश फेस देना चाह रहे थे।  इसके लिए मुंबई में जितने भी विलेन थे, उन सभी के ऑडिशन लिए थे। लेकिन जावेद ने जिस रुवाब से मोगैंबो के किरदार को लिखा था, उस पर कोई सही उतर नहीं पा रहा था तो हमने फाइनली अमरीश पुरी जी को ही लेना सही समझा। उस समय वे बहुत बिजी चल रहे थे। हमने उनसे कहा कि मुझे अगले हफ्ते से आपके 60 दिन चाहिए, क्योंकि पूरे क्लाइमैक्स के लिए आर के स्टूडियो में हमारे कुल 5 सेट लगे थे। उन्होंने तुरंत हां बोल दिया। 

दरअसल जब एक्टर्स पास जाते हैं तो वह कहते हैं कि सोचेंगे, करेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने इसके बारे में बहुत सुना है और मैं खुश हूं कि तुम फाइनली मेरे पास आ गए। मैं जो भी डेट होगी आपकी उससे मैच करूंगा। इस तरह हमने शूटिंग शुरू की और बड़े विलेन के रूप में अमरीश पुरी का एक नया चेहरा सामने आया। हमने हम पांच में भी उन्हें इसीलिए लिया था कि यह एक फ्रेश फेस हैं। शोले में जब अमजद खान लाॉन्च हुए थे, वह भी बिल्कुल फ्रेश फेस थे।

मोगैंबो के लिए खुद डिजाइन करवाए कॉस्टयूम

हमने अमरीश पुरी को मोगैंबो तो बना लिया था, पर हमारे दिमाग में उसकी कॉस्टयूम और गेटअप क्लीयर नहीं था। पूरा गेटअप बनाने में अमरीश पुरी का बड़ा हाथ रहा। अपने खास टेलर माधव के साथ मिलकर अमरीश ने पूरा गेटअप डिजाइन बनवाया। मैं उस कॉस्टयूम से इतना प्रभावित हुआ था कि मैंने उनके डिजाइनर माधव को उस समय 10 हजार रुपए बोनस में दिए। हमारे मन में विलेन का किरदार तो था, पर क्लियर विजुअल नहीं था। इसे अमरीश जी ने खुद बनाया। बिग, कॉस्टयूम, हाथ में ली हुई छड़ी सब अमरीश ने खुद ही माधव के साथ डिजाइन की थी।

मोगैंबो के लिए किया खूब रिहर्सल 

अमरीश पुरी की आदत थी, जब उन्हें रोल भा जाता था, तब वह हर चीज की डिटेलिंग में जाते थे और मोगैंबो की हर डिटेलिंग में जाकर उन्होंने कमाल का काम किया। इस किरदार को जीवंत करने के लिए उन्होंने खूब रिहर्सल की थी। उन्होंने हर डायलॉग जावेद जी के साथ बैठकर पढ़ा था साथ ही सेट पर शेखर ने भी उनसे रिहर्सल्स करवाई। उन्होंने हर चीज के लिए बहुत ज्यादा कड़ी मेहनत की थी।

पूरा क्रेडिट में अमरीश पुरी को देना चाहूंगा

हीरो बड़ा तब होता है, जब सामने विलेन टक्कर का हो। मिस्टर इंडिया के सामने हमें बड़ा विलेन चाहिए था और मैं नहीं समझता कि अमरीश पुरी से बड़ा विलेन कोई हो सकता है। इसका पूरा क्रेडिट मैं अमरीश पुरी को देना चाहूंगा। खैर, लाइन तो जावेद जी ने लिखी थी- मोगेंबो खुश हुआ। यह तकिया कलाम लोग आज तक याद करते हैं, पर इस किरदार में चार चांद अमरीश पुरी ने अपनी मेहनत से लगाए थे।

मोगैंबो की कामयाबी से मिली और फिल्में

मिस्टर इंडिया के बाद हमने विरासत में उनके साथ काम किया। इस पूरे प्रोजेक्ट का सेटअप मैंने किया था। इसमें फिर अमरीश जी ने पॉजिटिव रोल किया था और कमाल का काम किया था। साथ ही मिस्टर इंडिया के बाद उन्होंने उनकी हॉलीवुड की पहली फिल्म की, साथ ही साउथ के भी नंबर वन विलेन हो गए थे। वे वहां की भी बड़ी फिल्मों में विलेन हुआ करते थे। यह सब मोगैंबो पर की हुई उनकी मेहनत की वजह से था।

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